यह घोषणापत्र अर्पित है उन भारतीय नागरिकों व सैनिकों को- जो एक मुर्दा क़ौम में रहते हुए भी- खुद को जिन्दा समझते हैं!

गुरुवार, 29 सितंबर 2016

अध्याय- 52: सड़क


52.1        देश में सड़कों के जाल को निम्न प्रकार व्यवस्थित किया जाएगाः-
                (क) राज्यों की 54 राजधानियों (तथा कुछ बड़े शहरों) को जोड़ने वाली सड़कें अधिकतम 50 फीट चौड़ी होंगी, ये राष्ट्रीय राजपथ होंगी और इनपर राष्ट्रीय सरकार का नियंत्रण होगा।
                (ख) एक राज्य के 9 जिला शहरों को जोड़ने वाली सड़कें अधिकतम 40 फीट चौड़ी होंगी, ये राज्य राजपथ होंगी और इनपर राज्य सरकार का नियंत्रण होगा।
                (ग) एक जिले के अन्दर के 9 प्रखण्ड शहरों को जोड़ने वाली सड़कें अधिकतम 30 फीट चौड़ी होंगी, इन जिला-पथों पर जिला प्रशासन का नियंत्रण होगा।
                (घ) एक प्रखण्ड के अन्दर विभिन्न कस्बों, गांवों को जोड़ने वाली सड़कें अधिकतम 20 फीट चौड़ी होंगी, इन प्रखंड-पथों पर प्रखंड प्रशासन का नियंत्रण होगा।
                (ङ) महानगर, नगर, गाँव के अन्दर की सड़कों पर नियंत्रण क्रमशः महानगरपरिषद, नगरपरिषद, ग्राम पंचायत का होगा।
52.2        प्रमुख व्यवसायिक केन्द्रों को आपस में जोड़ते हुए कुछ फ्लाइओवर मालवाहक सड़कों का भी निर्माण किया जाएगा।
                फ्लाइओवर मकड़जालसाइकिल ट्रै
52.3        अधिक जनसंख्या घनत्व वाले नगरों/महानगरों में साइकिल ट्रैक बनाये जायेंगे, जिसकी निम्न विशेषतायें होंगीः-
                (क) ये ट्रैक फ्लाइओवर यानि खम्भों पर बने होंगे, इनकी संरचना मकड़ी के जालेपर आधारित होगी और ये छायादार होंगे।
                (ख) इन मकड़जालसाईकिल ट्रैकों पर हर प्रकार की साइकिलें पर्याप्त मात्र में उपलब्ध रहेंगी; लोग सस्ते में टिकट कटाकर इन ट्रैकों पर आयेंगे और कोई भी साईकिल उठाकर (नगर/महानगर) के अन्दर कहीं भी आ-जा सकेंगे। (जाहिर है- यहाँ उपलब्ध साइकिलें खास प्रकार की होंगी- ट्यूबलेस टायर, इण्डिकेटर, हेडलाईट के साथ।)
                (ग) इन ट्रैकों के प्रत्येक खम्भे पर सीढ़ियों तथा (स्वचालित) टिकट खिड़कियों की व्यवस्था रहेगी और बेशक, एक टिकट सारे दिन के लिए वैध होगा।
                देशाटन साइकिल ट्रैक
52.4        देश के सभी प्रमुख दर्शनीय स्थलों को आपस में जोड़ते हुए भी एक फ्लाइओवर साईकिल ट्रैक का निर्माण किया जाएगा, जिसपर साहसी लोग देशाटन कर सकेंगे। (बेशक, इस ट्रैक पर जगह-जगह रात्रि-पड़ाव, भोजन-पानी इत्यादि की व्यवस्था रहेगी।)

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