यह घोषणापत्र अर्पित है उन भारतीय नागरिकों व सैनिकों को- जो एक मुर्दा क़ौम में रहते हुए भी- खुद को जिन्दा समझते हैं!

बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

अध्याय- 16: उद्योग-व्यापार


16.1   बड़े और मँझोले व्यवसायिक/औद्योगिक घरानों को क्रमशः 7 और 5 वर्षों के लिये किसी भी नये उद्यम में पूँजी लगाने से रोक दिया जायेगा और इस अवधि में बैंकों से किसी प्रकार की ऋण या आर्थिक मदद भी इन्हें नहीं दी जायेगी।
16.2   जिन सामान्य उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादान लघु एवं कुटीर उद्योगों में सम्भव है, उनका मध्यम तथा वृहत् उद्योगों द्वारा उत्पादन/निर्माण बन्द कर दिया जायेगा।
16.3   वृहत् तथा मध्यम दर्जे के नये उद्यम (सरकारी या निजी) उन्हीं क्षेत्रों में स्थापित किये जायेंगे, जहाँ उद्योग-धन्धे नहीं हैं, या कम हैं।
16.4   किसी भी बहुराष्ट्रीय/विदेशी कम्पनी को किसी भारतीय कम्पनी में 33 प्रतिशत तक पूँजी निवेश करने की अनुमति दी जायेगी- उन्हें स्वतंत्र रुप से देश में व्यापार करने नहीं दिया जायेगा।
16.5   हालाँकि प्रवासी भारतीयों की विदेशी कम्पनियों को देश की किसी कम्पनी में 49 प्रतिशत तक पूँजी निवेश की अनुमति होगी।
16.6   बड़ी संख्या में आम लोगों को रोजगार दिलाने वाले और आम लोगों की जरुरत की वस्तुएँ/सेवायें पैदा करने वाले उपक्रमों की 50 फीसदी हिस्सेदारी राष्ट्रीय सरकार अपने पास रखेगी तथा बाकी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी उस उपक्रम के कार्यशीलमजदूरों एवं कर्मियों के बीच बाँट देगी।
16.7   जिन उपक्रमों द्वारा उत्पादित सेवाओं/वस्तुओं का आम जनता की जरुरत से सम्बन्ध नहीं है, या कम है, उन सबका निजिकरण किया जायेगा। (जैसे कि- एयरलाइन्स।)
16.8   आम जनता के लिए’- ‘आवश्यकवस्तुओं/सेवाओं पर से सभी प्रकार के कर हटा लिये जायेंगे; ‘आरामदायकवस्तुओं/सेवाओं पर लगने वाले करों को कम कर दिया जायेगा; और, इन सबकी भरपाई विलासिता’ (‘आम जनता के लिए विलासिता’) की वस्तुओं/सेवाओं पर कर बढ़ा कर की जायेगी।
16.9   इसी प्रकार, आम जनता के लिये आवश्यक वस्तुओं की आयात पर 5 प्रतिशत, आरामदायक वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तथा विलासिता की वस्तुओं की आयात पर 100 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया जायेगा।
16.10  विभिन्न उद्योग-धन्धों में प्रदूषण नियंत्रण, गुणवत्ता नियंत्रण तथा अनुसन्धान एवं विकास के लिये सरकार बाकायदे तीन विभाग बनायेगी और इन विभागों के माध्यम से उद्योग-धन्धों को हर सम्भव मदद देगी।
16.11  किसी भी निर्यात को- खासकर कृषि एवं बागवानी क्षेत्र से- सरकार की ओर से प्रोत्साहन या संरक्षण नहीं दिया जायेगा।
16.12  विदेशी व्यापार को सदैव सन्तुलन की स्थिति में रखा जायेगा- किसी भी देश (खासकर अमीर देश) से भारत उतनी ही रकम का आयात करेगा, जितनी का वह देश भारत से आयात करता है।
16.13  आर्थिक समानता, क्षेत्रीय आत्म-निर्भरता और उपयोगवाद’ (‘उपभोगवादनहीं) के सिद्धान्तों को मानने वाले अर्थशास्त्रियों की एक स्वायत्त राष्ट्रीय समिति गठित की जायेगी, जो विभिन्न उद्योग-धन्धों की उत्पादन क्षमता तथा वितरण क्षेत्र का नियंत्रण/निर्धारण करेगी। (बेशक, विभिन्न उद्योग-धन्धों के प्रतिनिधियों को लेकर एक महासभा भी होगी, जो केन्दीय समिति को सुझाव दे सकेगी।)
16.14  विश्व बैंक (WB) अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) को संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के अधीन लाने तथा इनकी नीतियों को गरीब एवं विकासशील देशों के अनुकूल बनाने की माँग की जायेगी, अन्यथा इन तीनों संस्थाओं के निर्देशों को मानने के लिये भारत बाध्य नहीं होगा।

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