यह घोषणापत्र अर्पित है उन भारतीय नागरिकों व सैनिकों को- जो एक मुर्दा क़ौम में रहते हुए भी- खुद को जिन्दा समझते हैं!

शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2016

अध्याय- 3: ‘भ्रष्ट-चौकड़ी’ का निर्वासन


3.1    अण्डमान में 4 या अधिक विशेष न्यायालयों की स्थापना कर (क) राजनेताओं, (ख) उच्चाधिकारियों, (ग) पूँजीपतियों तथा (घ) माफिया सरगनाओं से जुड़े भ्रष्टाचार-सम्बन्धी तथा आपराधिक मामलों को वहाँ स्थानान्तरित किया जायेगा।
3.2    इन मामलों के अभियुक्तों को भी वहाँ नजरबन्द (माफिया के मामले में कैद) किया जायेगा।
3.3    प्रत्येक विशेष न्यायालय में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त तीन वरिष्ठ न्यायाधीश एक-एक ज्यूरी की मदद से इन मामलों की सुनवाई करेंगे।
3.4    ज्यूरी के 12 में से 7 सदस्य जागरुक नागरिक तथा 5 सदस्य बुद्धिजीवि होंगे। (नागरिक सदस्यों का चयन देश के अलग-अलग हिस्सों तथा व्यवसायों से किया जायेगा, जबकि बुद्धिजीवियों के रुप में हिन्दी, बाँग्ला, उर्दू, तमिल और मलयालम भाषाओं के प्रतिष्ठित समाचारपत्रों के राजनीतिक विश्लेषकों का चयन किया जा सकता है।)
3.5    संक्षिप्त सुनवाई के बाद ज्यूरी के कम-से-कम 7 सदस्यों (या 4 नागरिक और 3 बुद्धिजीवियों सदस्यों) तथा 2 न्यायाधीशों द्वारा दोषी समझे गये अभियुक्तों को 12 वर्षों के लिये निकोबार के एक टापू पर निर्वासित जीवन बिताने के लिये भेज दिया जायेगा- बेशक, उनके नागरिक अधिकारों को निलम्बित करते हुए।
3.6    जाहिर है, निर्दोष साबित होने वाले अभियुक्तों को बाइज्जत बरी किया जायेगा।
3.7    इन अदालतों में अधिकतम 2 वषों के अन्दर फैसले का आना अनिवार्य होगा।
3.8    इस विशेष अदालत के सामने आत्म-समर्पण न करने वाले (राजनेता, उच्चाधिकारी, पूँजीपति) अभियुक्तों को न केवल नागरिक सुविधाओं (पानी, बिजली, फोन, बैंकिंग, ड्राइविंग इत्यादि) से वंचित कर दिया जायेगा, बल्कि उनकी जान-माल की रक्षा का दायित्व लेने से भी राष्ट्रीय सरकार इन्कार कर देगी।
3.9    जो माफिया सरगना आत्म-समर्पण नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कमाण्डो दस्तों को उतारा जायेगा और जाहिर है कि इस कमाण्डो कार्रवाई में उनकी जान जाने की ही आशंका ज्यादा होगी।

(टिप्पणीः बिना पर्यावरण को नुकसान पहुँचाये निकोबार द्वीपसमूह के एक टापू पर जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की व्यवस्था की जायेगी, जहाँ निर्वासन काटा जा सके।)

       ***
-----------------------------------------------------------------------------------------------------
नोट- यह 'घोषणापत्र' eBook के रुप में निश्शुल्क उपलब्ध है- डाउनलोड करने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें