यह घोषणापत्र अर्पित है उन भारतीय नागरिकों व सैनिकों को- जो एक मुर्दा क़ौम में रहते हुए भी- खुद को जिन्दा समझते हैं!

बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

अध्याय- 43: ऊर्जा


43.1        सोलर सिस्टम और सौर ऊर्जा से चालित उपकरणों (बल्ब, पंखा, चूल्हा इत्यादि) के निर्माण के लिए 6 बड़े कारखाने (छहों अंचलों में एक-एक) स्थापित किये जायेंगे; जहाँ चार शिफ्टों में काम करते हुए देश में रहने वाले प्रत्येक परिवार के लिए सोलर सिस्टम और सौर ऊर्जा चालित उपकरणों के सेटतैयार किये जायेंगे।
43.2        निम्न आयवर्ग के परिवारों से सेट का 5 प्रतिशत, मध्यम आयवर्ग वालों से 50 प्रतिशत और उच्च आयवर्ग के परिवारों से सेट का 90 प्रतिशत कीमत लिया जाएगा। (जाहिर है, निम्न आयवर्ग वालों में जो परिवार 5 प्रतिशत कीमत देने में भी असमर्थ होंगे, उनसे कोई कीमत नहीं ली जायेगी।)
43.3        सार्वजनिक स्थलों (सड़क, रेल-स्टेशन, हवाई-अड्डा इत्यादि) तथा सरकारी भवनों में दो तिहाई (66 प्रतिशत) बल्ब और पंखों को सौर-ऊर्जा से चालित बनाया जायेगा और निजी भवनों में भी इस अनुपात को अपनाने में सरकार आर्थिक मदद देगी। (सार्वजनिक स्थलों के लिए ऐसे पंखे भी विकसित किये जा सकते हैं, जिन्हें कमानीमें चाबी भरकर चलाया जा सके।)
43.4        प्रत्येक जिले में एक बिजली उत्पादन इकाई स्थापित करने की कोशिश की जायेगी, जो किसी भी स्रोत पर आधारित हो सकती है- कोयला, भू-ताप, नदी, हवा, धूप, समुद्र की लहरें इत्यादि, जो भी वहाँ उपलब्ध हो। (जाहिर है, प्रत्येक महानगर में भी एक इकाई होगी।)
43.5        बिजली घर की बिजली का उपयोग मुख्य रूप से मशीनों आदि को चलाने में किया जायेगा, जबकि रोशनीपाने के लिए सौर-ऊर्जा को मुख्य स्रोत बनाया जायेगा।
43.6        कारखानों या कारखानों के समूह को अपना खुद का बिजली संयंत्र स्थापित करने में सरकार हर संभव मदद देगी।
43.7        दो छोरों पर इस्पात की मजबूत स्प्रिंग लगाकर एक विशालकाय पेण्डुलम को सदा के लिए गतिशील बनाकर, इसकी गतिज ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा पैदा की जा सकती है- इस प्रकार के छोटे-छोटे निजीबिजलीघर बनाने के लिए सरकार नागरिकों/संस्थानों/प्रतिष्ठानों को तकनीकी तथा आर्थिक मदद देगी।
43.8        परमाणु विखण्डन“ (Fission) पद्धति का बिजली बनाने में इस्तेमाल नही किया जाएगा; इसके स्थान पर समुद्र जल के ड्युटेरियमके परमाण्विक संयोजन“ (Fusion) से अनन्त ऊर्जा पाने की कोशिशों के लिए विशेष प्रयोगशालाओं की स्थापना की जायेगी और वैज्ञानिकों को इस दिशा में शोध के लिए प्रेरित किया जायेगा।
43.9        क्रमांक- 52.3 में नगरों/महानगरों में फ्लाइओवर तथा छायादार साइकिल ट्रैकों के निर्माण का जिक्र है- इन्हें छायादार बनाने के लिए सौर-पैनलों के छप्परका प्रयोग किया जा सकता है, और इससे प्राप्त ऊर्जा से न केवल साइकिल-ट्रैक को, बल्कि आस-पास की सड़कों को भी रोशन किया जा सकता है।

                ***
-----------------------------------------------------------------------------------------------------
नोट- यह 'घोषणापत्र' eBook के रुप में निश्शुल्क उपलब्ध है- डाउनलोड करने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें