यह घोषणापत्र अर्पित है उन भारतीय नागरिकों व सैनिकों को- जो एक मुर्दा क़ौम में रहते हुए भी- खुद को जिन्दा समझते हैं!

बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

अध्याय- 47: सजा का निर्धारण


47.1        किसी भी अपराध को निम्नलिखित पाँच में से किसी एक या एकाधिकश्रेणी/श्रेणियों के अर्न्तगत लाकर सजा का निर्धारण किया जाएगाः-
                (क) कायदे-कानूनों का उल्लंघन, जिससे किसी को नुकसान नही पहुँचता हो; सजा- चेतावनी या जुर्माने से लेकर 1 वर्ष से कम की कैद।
                (ख) व्यक्ति, परिवार या संस्था को नुकसान पहुंचाने वाले अपराध; सजा- 1 से 3 वर्ष तक की कैद।
                (ग) समाज, संस्कृति या सभ्यता को नुकसान पहुँचाने वाले अपराध; सजा- 4 से 6 वर्ष तक की कैद।
                (घ) राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय एकता या राष्ट्रीय सम्पत्ति (सरकारी खजाना सहित) को नुकसान पहुँचाने वाले अपराधय; सजा- 7 से 9 वर्ष तक की कैद।
                (ङ) मानवता, पर्यावरण या जैव-विविधता को नुकसान पहुँचाने वाले अपराध; सजा- 10 से 12 वर्ष तक की कैद।
47.2        एक ही अपराध जब एक से अधिक श्रेणियों के अर्न्तगत आये, तो सजा भी जोड़कर दी जायेगी।
47.3        अदालत में अपना दोष स्वयं स्वीकार करनेवाले दोषियों को सजा में रियायत देने का विवेकाधिकारन्यायाधीशों को प्राप्त होगा। (इस विवेकाधिकार का इस्तेमाल करते समय न्यायाधीशों को जनभावनाका भी ध्यान रखना चाहिए।)
47.4        ऊपर जिन सजाओं का जिक्र है, वे उन नागरिकों पर लागू होंगी, जिन्हें सरकारी वेतननहीं मिलता; सरकारी वेतन पाने वाले दोषियों के मामले में उन्हीं सजाओं को निम्न अनुपात में बढ़ाने का अधिकार न्यायालय के पास होगाः-
                (क) कर्मचारियोंके मामले में दोगुना;
                (ख) अधिकारियोंके मामले में तीनगुना;
                (ग) उच्चाधिकारियोंके मामले में चारगुना, और
                (घ) राजनेताओंके मामले में पाँचगुना।

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