गुरुवार, 29 सितंबर 2016

अध्याय- 50: प्रतिरक्षा (सेना)

50.1    सैन्य-जीवन मुख्य रूप से एक पेशा तो है ही, इसे "सैन्य-शिक्षा" के रूप में भी अपनाया जायेगा और इसके लिए दसवीं पास विद्यार्थियों को 8 वर्षों की सामान्य सेवा तथा 2 वर्षों की आरक्षित सेवा की शर्तों पर सेना में भर्ती किया जायेगा।
50.2    एक ‘सेना मुक्त विश्वविद्यालय’ की स्थापना की जायेगी, जो सैनिकों को उनकी 8 वर्षों की सेवा के दौरान स्नातकोत्तर (एम.ए.) स्तर तक की शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था करेगा।
50.3    न्यूनतम 8 वर्षों की "सैन्य शिक्षा प्राप्त" युवाओं को कुछ सरकारी सेवाओं (जैसे- पुलिस) में प्राथमिकता एवं वरीयता दी जायेगी; जबकि अन्यान्य नाागरिक सेवाओं की प्रतियोगिता-परीक्षाओं में 20 प्रतिशत अंकों का ‘ग्रेस’ उन्हें दिया जायेगा। (ऐसे युवाओं को अपने नागरिक कार्यस्थल पर नागरिक पहनावे पर भी "राष्ट्रचिह्न" धारण करने की छूट होगी और इन्हें नयी नौकरी में सैन्यसेवा के बदले एक अतिरिक्त वेतनवृद्धि भी दी जायेगी।)
50.4    आठ वर्षों के बाद- अपनी इच्छा से- सेना में ही बने रहने वाले युवाओं को विवाह की अनुमति दी जायेगी और वे अवकाश प्राप्ति की उम्र तक सेना में बने रह सकेंगे।
50.5    सैनिकों को 8 वर्षों की सेवा के बाद वेतन का 33 प्रतिशत तथा 16 वर्षों की सेवा के बाद वेतन का 66 प्रतिशत पेन्शन के रूप में दिया जायेगा- अर्द्धसैनिक बलों के मामले में यह क्रमशः 30 और 60 प्रतिशत होगा।
    (टिप्पणीः नागरिक सेवाओं के मुकाबले सैनिकों को 10 प्रतिशत तथा अर्द्धसैनिकों को 5 प्रतिशत अधिक वेतन देने वाले प्रावधान का जिक्र क्रमांक- 8.7 में है।)
50.6    शान्ति के दिनों में सेना में काम के घण्टे, कार्य दिवस, बोनस, न्याय इत्यादि की व्यवस्था ‘अध्याय- 17ः सरकारी काम-काज’ के अनुरूप ही रहेगी- हाँ, काम के घण्टों को युद्ध, युद्ध की तैयारी या आठ वर्षीय युद्धाभ्यास के दौरान दोगुना तक बढ़ाया जा सकेगा।
50.7    पेट्रो पदार्थों की खपत में 33 से 66 प्रतिशत तक कमी करते हुए सेनाओं के ‘दैनिक’ युद्धाभ्यासों में कटौती की जायेगी और इसकी भरपाई के लिए आठ वर्षों में एक बार ‘राष्ट्रीय युद्धाभ्यास’ किया जायेगा, जिसमे देश के नागरिक भी शामिल होंगे।
50.8    सेना की जरूरत के सभी साजो-सामान (टैंक, जलपोत, वायुयान, राडार इत्यादि सभी कुछ) देश के अन्दर ही तैयार किये जायेंगे। (जो देश अपनी रक्षा-प्रतिरक्षा सामग्रियों का निर्माण/उत्पादन स्वयं ना कर सके, उसे स्वतंत्र रहने का नैतिक अधिकार है?)
50.9    प्रतिरक्षा के मामले में भारत सिर्फ संयुक्त राष्ट्र संघ की नीतियों का सम्मान और पालन करेगा, बाकी किसी भी नीति या सन्धि को मानने-न मानने के लिए भारत स्वतंत्र होगा।
50.10    पहले आक्रमण न करने, खासकर पहले ‘परमाणु आक्रमण’ न करने की नीति पर भारत कायम रहेगा, मगर भारत पर आक्रमण होने पर भारत कई गुना अधिक शक्ति के साथ प्रत्याक्रमण के लिए सदैव तत्पर रहेगा।

    परमाणु निरस्त्रीकरणः एक प्रस्ताव

50.11    ‘परमाणु अस्त्रों से रहित विश्व’ के निर्माण के लिए भारत 10 वर्षीय कार्यक्रम की एक रूपरेखा यू.एन.ओ. के सामने रखेगा, जिसके अन्तर्गत परमाणु शक्ति से सम्पन्न सभी देश अपने परमाणु अस्त्रों के जखीरे का 10 प्रतिशत हिस्सा प्रतिवर्ष एक स्थान पर इकट्ठा करेंगे और एक अंतरिक्षयान में रखकर इन्हें बाहरी अन्तरिक्ष में भेज देंगे। (इस कार्यक्रम का खर्च सम्बन्धित देश अस्त्रों की संख्या (नगों) के अनुपात में मिलकर वहन करेंगे।)
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