गुरुवार, 29 सितंबर 2016

अध्याय- 51: रेलवे

51.1    भारतीय रेल में मुफ्त यात्रा की परिपाटी समाप्त की जायेगी- 50 फीसदी छूट रेल एवं सैन्यकर्मियों तथा उनके परिजनों, नाबालिगों, बुजुर्गों, अपंगों और जनप्रतिनिधियों को दी जायेगी। (इस छूट के लिए कागजी कार्रवाई की बाध्यता नहीं रखी जायेगी- सामान्य परिचयपत्र या चिकित्सकों के प्रमाणपत्र पर ही यह छूट दी जायेगी और यह भी नहीं देखा जायेगा कि छूट कितनी बार ली जा रही है।)
51.2    प्रमुख व्यवसायिक केन्द्रों को जोड़ते हुए मालगाड़ियों के लिए अलग से एक रेलपथ बिछाया जाएगा- पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने के लिए खास ध्यान रखा जायेगा।
51.3    प्रमुख सैन्य अड्डों को जोड़ते हुए अलग से एक सेना रेलपथ बिछाया जाएगा।
51.4    प्रमुख दर्शनीय स्थलों को जोड़ते हुए और आवश्यकतानुसार नयी पटरियाँ बिछाते हुए एक ”भारत भ्रमण रेलवे“ का गठन किया जाएगा, जिसमें 50 फीसदी स्थान 12 से 17 वर्ष के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित रहेगा और बेशक, उनसे किराया भी आधा ही लिया जाएगा। (देशाटन को शिक्षा का अंग बनाये जाने की बात शिक्षा के अन्तर्गत कही गयी है।)
51.5    भारतीय रेल में कुल 7 प्रकार यात्री रेलगाड़ियाँ चलेंगीः-
    (क) लाल ट्रेनः दूरी- 100 किलोमीटर तक, पड़ाव- प्रत्येक स्टेशन/हॉल्ट पर। (इस ट्रेन को पूर्णतः ‘फ्लाइओवर’ बनाने की कोशिश की जायेगी-  इसका जिक्र परिशिष्ट- ‘इ’ में है।)
    (ख) नारंगी ट्रेनः दूरी- 100 से 500 किमी तक, पड़ाव- आधे घण्टे/30 किमी पर।
    (ग) पीली ट्रेनः दूरी 500 से 1000 किमी तक, पड़ाव- एक घण्टे/60 किमी पर।
    (घ) हरी ट्रेनः दूरी 1000 से 1500 किमी तक, पड़ाव- डेढ़ घण्टे/90 किमी पर।
    (ङ) आसमानी ट्रेनः दूरी 1500 से 2000 किमी तक, पड़ाव- दो घण्टे/120 किमी पर।
    (च) नीली ट्रेनः दूरी 2000 से 2500 किमी तक, पड़ाव- ढाई घण्टे/150 किमी पर।
    (छ) बैंगनी ट्रेनः दूरी 2500 किमी से अधिक, पड़ाव- तीन घण्टे/180 किमी पर।
    (जाहिर है, दूरी तथा पड़ाव वाली बातें ‘लगभग’ में है।)
51.6    भारतीय रेलवे की ओर से देश में कुपोषण दूर होने तक खाद्य तेलों और दालों की ढुलाई मुफ्त की जायेगी।
51.7    भारतीय रेलवे में से ‘एयर कण्डीशनर’ को हटाकर इसके स्थान पर डेजर्ट कूलर व हॉट एयर ब्लोअर का इस्तेमाल किया जाएगा। (सी.एफ.सी. गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए।)
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1 टिप्पणी:

  1. आप बहुत ही उत्कृष्ट सोच एवँ मजबूत समझदारी वाले व्यक्ति हैं । रेल परिचालन संबंधित आपका सुझाव भी स्वागत योग्य है। पर यहां तो रेलवे ही बिकने के लिए खड़ी है। आपके लिए दो विकल्प है जहाँ आप अपने प्लान को धरातल पर रख सकते हैं। पहला - बिक्री हेतु नामांकित रेल परिक्षेत्र को खरीद लें। दूसरा लोकतांत्रिक पद्धति से चुनकर सांसद बन सरकारी तंत्र का हिस्सा बनें। आपके विचार (घोषणा पत्र) धरातल पर उतरे, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ -

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