गुरुवार, 29 सितंबर 2016

अध्याय- 53: बहुद्देशीय नागरिक पहचान पत्र

53.1    देश में प्रचलित कुछ परिचयपत्रों- जैसे, मतदाता पहचानपत्र, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेन्स इत्यादि को एकीकृत करते हुए एक ही बहुद्देशीय राष्ट्रीय पहचानपत्र नागरिकों को जारी किये जायेंगे, जिनकी निम्न विशेषतायें होंगीः-
    (क) पहचानपत्र दो प्रकार के होंगे- ‘भारतीय नागरिक पहचानपत्र’ और ‘भारतीय सीमित नागरिकता पहचानपत्र’ (विस्तृत व्याख्या ‘अध्याय- 18: भारत की नागरिकता’ में।)
    (ख) नागरिकों को जारी होने वाले बहुद्देशीय पहचानपत्र की ‘किनारी’ का रंग निम्न आयवर्ग के लिए लाल; मध्यम आयवर्ग के लिए हरा, और उच्च आयवर्ग के लिए नीला रहेगा।
    (गा) पहचानपत्र के शुरू के 5 अंक क्रमशः धारक नागरिक के अँचल, राज्य, जिला (या महानगर), प्रखंड (या नगर/उपमहानगर) तथा थाना की जानकारी देंगे, बाद के 2 अंक पंचायत (या वार्ड) की जानकारी देंगे, जबकि अन्तिम 4 अंक धारक नागरिक का नंबर होगा।
    (घ) पहचानपत्र के नम्बर का उल्लेख धारक नागरिक के सभी सरकारी और निजी दस्तावेजों में किया जाएगा। (‘राष्ट्रीय बैंक’ में पहचानपत्र के इस नम्बर को ही ‘खाता संख्या’ माना जायेगा।)
    (ङ) धारक की व्यक्तिगत जानकारियों तथा छायाचित्र के अलावे पहचानपत्र में उसके अँगूठे (या किसी उँगली) का निशान पारम्परिक तरीके से (यानि स्याही से) अंकित किया जायेगा, जिसका उपयोग आपात्कालीन/विशेष परिस्थितियों में किसी की पहचान सुनिश्चित करने में किया जा सकेगा।
    (च) नागरिक पहचानपत्र एक "अति महत्वपूर्ण दस्तावेज" होगा, अतः इसे हासिल करने के लिए अपनी पहचान, आर्थिक स्थिति, अपने पूर्वजों (अगला विन्दु) और अपने मूल निवास के बारे में गलत एवं भ्रामक जानकारी देने वाले लोगों को (इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराध मानकर) 9 वर्षों के कारावास की सजा दी जायेगी।
    (छ) पूर्वजों की जानकारी के मामले में 30 वर्ष से कम आयु के नागरिक पिता, दादा और परदादा की जानकारी देंगे; 30 से 60 वर्ष की आयु वाले पिता और दादा की जानकारी देंगे, जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु वाले नागरिकों के लिए सिर्फ पिता की जानकारी देना ही पर्याप्त मन जायेगा। (जाहिर है- पिता, दादा और परदादा के स्थान पर माता, नानी, परनानी के नाम भी दिए जा सकते हैं।)
    (ज) पहचानपत्र के ब्यौरों को दो हिस्सों- सार्वजनिक व गोपनीय- में बाँटकर एक अखिल भारतीय कम्प्यूटर नेटवर्क/डाटाबेस में सुरक्षित रखा जायेगा।
    (झ) सार्वजनिक ब्यौरों तक कोई भी अपनी पहुँच बना सकेगा, जबकि गोपनीय ब्यौरों तक पहुँच सिर्फ सरकारी अधिकारियों को प्राप्त होगी, जो अपने व्यक्तिगत पासवर्ड से यह पहुँच बना सकेंगे।
    (ञ) स्नातक के छात्रों को सरकार स्वतः पहचानपत्र जारी करेगी।
    (ट) प्रत्येक 10 वर्षों में पहचानपत्रों का नवीणीकरण किया जाएगा।
    (ठ) पहचानपत्र एक ओर राष्ट्रभाषा हिन्दी में तथा दूसरी ओर धारक नागरिक की इच्छानुसार किसी उप-राष्ट्रभाषा में छपा होगा।
    (ड) जहाँ तक विवादास्पद ‘आधार’ की बात है- यह राष्ट्रीय सरकार प्रत्येक नागरिक के आँखों की पुतलियों के निशान या उँगलियों के निशान को जमा करना अनुचित मानेगी; सिर्फ आदतन अपराधियों (हिस्ट्रीशीटर) के मामलों में यह प्रक्रिया अपनायी जायेगी।
    (ढ) जाहिर है कि किसी भी तरह की ‘बायोमेट्रिक प्रणाली’ को कहीं भी अनिवार्य नहीं बनाया जायेगा।
  
(टिप्पणीः क्रमांक 26.1 और 26.2 में जिक्र हो चुका है कि बहुद्देशीय नागरिक पहचानपत्र बनाने और इसके नवीणीकरण की व्यवस्था सम्भालने के लिए चुनाव आयोग में पर्याप्त संख्या में पूर्णकालिक कर्मियों की नियुक्ति की जायेगी और प्रखण्ड/नगर/उपमहानगर स्तर पर उसके कार्यालय बनाये जायेंगे।)
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