गुरुवार, 29 सितंबर 2016

अध्याय- 54: विविध

    कार्यपालिका प्रधान

54.1    मुख्य चुनाव आयुक्त को कार्यपालिका का प्रधान माना जायेगा और इनके द्वारा तैयार किये गये दिशा-निर्देशों के अनुसार ही असैनिक सरकारी कर्मचारियों/अधिकारियों का स्थानान्तरण किया जायेगा।
54.2    जब सरकार किसी कर्मचारी/अधिकारी का स्थानान्तरण करना चाहेगी, तो उसे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त से सहमती लेनी होगी।

    "बीस वर्ष नियम"

54.3    राष्ट्रीय सरकार द्वारा-
    (क) किसी योजना/परियोजना/निर्माण में किसी व्यक्ति के नाम, चित्र या प्रतिमा का उपयोग उसकी मृत्यु के कम-से-कम 20 वर्षों के बाद ही किया जा सकेगा।
    (ख) 20 वर्षों से अधिक पुराने गोपनीय दस्तावेजों को (उनके पुरानेपन के क्रम में) सार्वजनिक किया जायेगा।
    (ग) कानूनों का 20 वर्षों में समीक्षा, संशोधन एवं नवीनीकरण अनिवार्य किया जायेगा, अन्यथा वे निष्प्रभावी समझे जायेंगे।
    (घ) 20 वर्षों से अधिक पुरानी रचनाएँ ही पाठ्य-पुस्तकों (खासकर, साहित्य की) में शामिल की जाएँगी (किसी विषय में नवीनतम एवं आधुनिकतम जानकारी देने के लिए एक वार्षिक ‘चयनिका’ को पाठ्य-क्रम में शामिल किये जाने की बात शिक्षा अध्याय के अन्तर्गत कही गयी है)।
    (ङ) संविधान का प्रत्येक 20 वर्षों में एक बार पुनर्मूल्यांकन किया जायेगा और आवश्यकतानुसार संशोधन किये जायेंगे।
    (च) 20 वर्षों में एक बार ‘विमुद्रीकरण’ पर विचार करने का जिक्र एक अध्याय (काला धन) में कही जा चुकी है।

    राष्ट्रगीत/राष्ट्रधुन/विद्यालय गीत

54.4    ‘वन्दे मातरम्’ को राष्ट्रगीत का तथा ‘जन-गण-मन’ को राष्ट्रगान एवं राष्ट्रधुन का दर्जा पहले से इस देश में मिला हुआ है, यह कायम रहेगा; राष्ट्रीय सरकार की ओर से ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोतां हमारा’ गीत को विद्यालय गीत का दर्जा दिया जायेगा- आम तौर पर इस गीत का एक ही चरण- ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ ही गाया जायेगा, खास मौकों पर ही तीनों चरण गाये जायेंगे।
(टिप्पणीः ‘जन-गण-मन’ का एक और संस्करण है- ‘शुभ सुख चैन की बरखा बरसे भारत भाग है जागा’। इसमें सरल हिन्दुस्तानी शब्दों का प्रयोग हुआ है और ‘अधिनायक’ एवं ‘भारत भाग्य-विधाता’ शब्दों से परहेज किया गया है। इसकी धुन पर ही आज का ‘जन-गण-मन’ गाया जाता है। इस पर थोड़ी जानकारी परिशिष्ट- ‘ई’ में दी जा रही है।)     

    शहीद-स्मरण

54.5    दीवाली की शाम ‘शहीद स्मरण’ की परम्परा शुरू की जायेगी, जिसके अन्तर्गत घरों/मुहल्लों में शहीदों की तस्वीरों/शहीद स्मारकों के सामने दीपक जलाने के बाद ही इस प्रकाश पर्व को मनाया जायेगा। (आशा तो यही की जायेगी कि देश में रहने वाले सभी धर्मों के अनुयायी इस परम्परा का पालन करेंगे।)

    भारतीय सभ्यता-संस्कृति उत्सव

54.6    प्रतिवर्ष बसन्त और शरत काल में सप्ताह भर का ‘भारतीय सभ्यता-संस्कृति उत्सव’ मनाने की परम्परा शुरू की जायेगी, जिसके अन्तर्गत सरकारी/गैर-सरकारी संस्थाओं को विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रम एवं प्रतियोगितायें आयोजित करने के लिए प्रेरित किया जायेगा- इसमे जहाँ तक सम्भव होगा, राष्ट्रीय सरकार आर्थिक मदद देगी।

    जात-पाँत से मुक्ति

54.7    10वीं और 12वीं की परीक्षा के फॉर्म भरते वक्त अपने नाम में से जातिसूचक पदनाम का (सदा के लिए) परित्याग करनेवाले विद्यार्थियों को पढ़ाई जारी रखने तक बढ़ते क्रम में छात्रवृत्ति प्रदान की जायेगी।
54.8    सरकारी प्रपत्रों में से ‘जाति’ का कॉलम हटा दिया जायेगा और जनगणना में भी जाति नहीं पूछी जायेगी। (हालाँकि किसी को जाति आधारित संस्था का गठन करने, सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने और जातिगत आँकड़े इकट्ठा करने से रोका भी नहीं जायेगा।) 

    धर्म महासभा

54.9    देश में मौजूद सभी धर्मों, सम्प्रदायों, पंथों और मतों के 6-6 प्रतिनिधियों (बेशक, 3 महिला और 3 पुरुष) को लेकर एक ”अखिल भारतीय धर्म महासभा“ का गठन किया जायेगा, जो अपने वार्षिक अधिवेशनों में ”सर्वधर्म समभाव“ की नीति पर चलते हुए धर्म से जुड़ी समस्यायों का हल प्रदान करेगी। (महासभा के किसी निर्णय को पहले न्यायपालिका के पास समीक्षा के लिए भेजा जायेगा और वहाँ से स्वीकृति मिलने के बाद राष्ट्रीय संसद उसे कानून का रूप देकर देश में लागू करेगी।)
54.10    इस महासभा के लिए प्रतिनिधियों का चयन करते समय राष्ट्रीय सरकार इस बात का ध्यान रखेगी कि सिर्फ उदारवादी एवं मानवतावादी विचारकों/धर्मगुरुओं का ही चयन हो- कट्टरवादी एवं रूढ़ीवादी विचारकों/धर्मगुरुओं का प्रवेश इस महासभा में वर्जित होगा; इसी प्रकार, ‘पाँच सितारा’ बाबाओं का भी प्रवेश इसमें वर्जित होगा।

    ‘सन्यासी ब्रिगेड’

54.11    विभिन्न अखाड़ों के युवा सन्यासियों को बारी-बारी से शारदीय नवरात्र के समय सेना के किसी युद्धाभ्यास मैदान में 9 दिनों तक सीधे युद्धाभ्यास का प्रशिक्षण दिया जायेगा और दसवें दिन यानि विजयादशमी को इन्हीं के हाथों सेना के आयुधों की पूजा करवाई जायेगी। (आशा रखी जायेगी कि युद्ध के दिनों में ये सन्यासी स्वयं सेनाओं की मदद के लिए आगे आयेंगे।)

    "भारतश्री"

54.12    अलग-अलग राष्ट्रीय पुरस्कारों को बन्द कर प्रतिवर्ष निम्न 11 क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान करने वाले भारतीयों को "भारत-श्री" (या "भारत-सुश्री") की उपाधि तथा कुछ नगद राशि के साथ राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए जायेंगे- 1) साहित्य, 2) कला, 3) सामाजिक कार्य, 4) सांस्कृतिक गतिविधि, 5) कृषि, 6) उद्योग, 7) खेल-कूद, 8) चिकित्सा, 9) तकनीक/अभियांत्रिकी, 10) साहसिक अभियान और 11) विज्ञान/नई खोज/शोध या नया आविष्कार।
54.13    यह पुरस्कार दो श्रेणियों में दिया जायेगा- 1. ‘उदीयमान’, यानि युवाओं को और 2. ‘जीवनकाल’ ;स्पमिजपउम ।बीपमअमउमदजद्ध, यानि वरिष्ठ नागरिकों को।
54.14    ‘जीवनकाल’ के लिए "भारतश्री" की उपाधि पाने वाले वरिष्ठ नागरिकों को ही राज्यसभा (उच्च सदन) की सदस्यता प्रदान की जायेगी, जैसा कि अध्याय- 27 (राज्यसभा) के क्रमांक- 26.1 (ङ) में जिक्र है।

    भारतीय उपमहाद्वीप की एकता के लिए

54.15    "जम्बूद्वीप" (अध्याय- 28 विदेशनीति, क्रमांक- 28.1) के किशोर उम्र के विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष भारत भ्रमण पर बुलाया जायेगा और भारतीय विद्यार्थियों को इन देशों की यात्रा पर भेजा जायेगा। (ये किशोर जब अपने-अपने देशों के जिम्मेदार नागरिक बनेंगे, तब भारतीय उपमहाद्वीप को एक इकाई मानेंगे।)

    भारतीय सिनेमा/व्यंजन

54.16    दूतावासों के माध्यम से दुनिया के प्रमुख शहरों में सिनेमा हॉल तथा रेस्तोराँ का एक कॉम्प्लेक्स तैयार किया जायेगा, जहाँ सिनेमा हॉल में सदाबहार भारतीय फिल्में (बेशक, 20 साल से अधिक पुरानी) दिखायी जायेंगी (बेशक, दृश्य के साथ सम्बन्धित देश की भाषा में संवाद एवं गीतों का अनुवाद जारी रखते हुए) और रेस्तोराँ में शाकाहारी भारतीय व्यंजन परोसे जायेंगे।
54.17    जाहिर है, फिल्मों का चयन फिल्मकार ही करेंगे और फिल्म के सभी पहलूओं की जानकारी भी आग्रही दर्शकों को दी जायेगी; इसी प्रकार, व्यंजन बनाने की विधि भी इच्छुक ग्राहकों को दी जायेगी।

    सरकारी भवन

54.18    राष्ट्रीय सरकार के नये भवन- चाहे वे किसी भी विभाग के हों, या कितने भी क्षेत्रफल वाले हों- मूल रूप से एक ही डिजाईन के बनेंगे और वह डिजाईन होगी "स्वस्तिक" की- इससे हर भवन को चार खुले मैदान- छोटे या बड़े- मिल जाया करेंगे।
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