शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2016

अध्याय-1: शासन-प्रशासन

    शासन

1.1    देश में दस वर्षों के लिए कायम होने वाली नयी शासन-प्रणाली को प्रस्तुत घोषणापत्र में अब से ‘राष्ट्रीय सरकार’ कहा जायेगा।
1.2    राष्ट्रीय सरकार के सभा भवन, सत्र तथा कार्यवाही का विस्तृत विवरण परिशिष्ट- ‘अ’ में दिया जा रहा है, जो काफी हद तक ‘प्रत्यक्ष लोकतंत्र’-जैसा होगा।
1.3    राष्ट्रीय सरकार के पहले सत्र की पहली बैठक में चार महत्वपूर्ण घोषणायें जारी की जायेंगी- नये राष्ट्र, नये संविधान, नयी व्यवस्था तथा भावी ‘लोकतांत्रिक’ चुनावों पर।
1.4    नये राष्ट्र की घोषणाः 1947 के ‘सत्ता-हस्तान्तरण अधिनियम’ को रद्द करते हुए तथा ‘राष्ट्रमण्डल’ (कॉमनवेल्थ) की सदस्यता का परित्याग करते हुए 21 अक्तूबर 1943 के दिन नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा सिंगापुर में स्थापित ‘स्वतंत्र भारत की अन्तरिम सरकार’ को वैधानिक मान्यता दी जायेगी और नेताजी को स्वतंत्र भारत का पहला प्रधान माना जायेगा। (ऐसा होने से 21 अक्तूबर हमारा स्वतंत्रता दिवस बन जायेगा। वर्तमान स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त की वास्तविकता जानने के लिए कृपया परिशिष्ट- ‘आ’ देखें।)
1.5    नये संविधान की घोषणाः देशभर के विद्वानों को लेकर एक ‘संविधान महासभा’ के गठन की घोषणा की जायेगी, जो नागरिकों से विचार मँगवाकर "एक राष्ट्र- भारत, एक नागरिकता- भारतीय और एक संस्कृति- भारतीयता" के आधार पर एक नये संविधान का प्रारूप बनायेगी; इस प्रारूप पर देशभर में बाकायदे विचार-मन्थन होगा; आवश्यकतानुसार संशोधित प्रारूप प्रस्तुत किया जायेगा और अन्त में, 60 प्रतिशत से ज्यादा नागरिकों की सहमति से इसे लागू कर दिया जायेगा। (संविधान जब भी बनकर तैयार हो, इसे लागू 26 जनवरी के दिन ही किया जायेगा- इस प्रकार, यह दिन हमारा ‘गणतंत्र दिवस’ बना रहेगा। जब तक नया संविधान तैयार नहीं होता, वर्तमान संविधान के "नीति-निदेशक तत्व" प्रभावी रहेंगे।)
1.6    नयी व्यवस्था की घोषणाः प्रस्तुत घोषणापत्र में एक नये सरकारी वेतनमान का (अध्याय- 8 में) जिक्र है, उसी के तहत लाखों की संख्या में युवाओं की बहाली करते हुए, उन्हें नये ढंग से प्रशिक्षित करते हुए उन्हीं के बल पर नयी भारतीय राष्ट्रीय- सेना, प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा, न्यायपालिका, शिक्षा व्यवस्था, चिकित्सा व्यवस्था इत्यादि के गठन की घोषणा की जायेगी। (जब तक ‘भारतीय राष्ट्रीय’ सेवाओं के गठन का काम पूरा नहीं होता, वर्तमान ‘औपनिवेशिक’ सेवायें काम करती रहेंगी। जैसे-जैसे ‘भारतीय राष्ट्रीय’ सेवाओं के गठन का काम पूरा होते जायेगा, ‘औपनिवेशिक’ सेवाओं को समाप्त किया जायेगा। ‘औपनिवेशि’ सेवाओं के कर्मी भी ‘नये वेतनमान’ को अपनाते हुए ‘राष्ट्रीय सेवाओं’ में शामिल हो सकेंगे।)
1.7    भावी लोकतांत्रिक चुनावों की घोषणाः एक आदर्श चुनाव-व्यवस्था के तहत भावी लोकतांत्रिक चुनावों के लिए बाकायदे तिथियों की घोषणा की जायेगी- पाँचवें वर्ष में ग्राम-पंचायतों एवं वार्ड परिषदों के गठन के लिए; सातवें वर्ष में (प्रखण्ड-स्तरीय) ”जनसंसदों“ के गठन के लिए; नवें वर्ष में विधानसभाओं के गठन तथा मुख्यमंत्रियों के चयन के लिए और दसवें वर्ष में राष्ट्रीय संसद के गठन और प्रधानमंत्री के चयन के लिए। (कृपया अध्याय- 20 से 26 देखें।)
1.8    पहले सत्र की पहली बैठक में ही भारतीय जनता की ओर से द्वितीय विश्वयुद्ध के दिनों में नेताजी सुभाष की मदद करने के लिए जर्मनी और जापान के प्रति आभार एवं धन्यवाद प्रकट किया जायेगा और इन दोनों देशों के राजदूतों के हाथों में आभार एवं धन्यवाद पत्र सौंपा जायेगा।
1.9    कायदे से, राष्ट्रीय सरकार के गठन के तुरन्त बाद ही राज्यों की विधानसभाओं को भंग कर वहाँ भी राष्ट्रीय शासन लागू किया जाना चाहिए, मगर जनता की चुनी हुई सरकारों को अपना कार्यकाल पूरा करने का अवसर देते हुए राज्य सरकारों को वेतन-भत्तों-सुविधाओं तथा फिजूलखर्ची में कटौती करते हुए घाटे का बजट नहीं बनाने का निर्देश दिया जायेगा; मगर साथ ही, लगातार तीसरे वर्ष घाटे का बजट पेश करने वाली राज्य सरकार को बर्खास्त कर वहाँ राष्ट्रीय शासन लागू कर दिया जायेगा।

    प्रशासन

1.10    प्रशासन, पुलिस, सेना तथा न्यायपालिका में ईमानदार, कर्मठ एवं सच्चरित्र छवि रखने वाले कार्यरत उच्चाधिकारियों को आमंत्रित कर ‘राष्ट्रीय सचिवालय’ का गठन किया जायेगा। (राष्ट्रीय सरकार द्वारा लिये गये निर्णयों को अमली जाम पहनाने की जिम्मेवारी इस सचिवालय की ही होगी।)
1.11    इसके विपरीत, प्रशासन, पुलिस, सेना तथा न्यायपालिका में दागदार छवि रखने वाले उच्चाधिकारियों को लम्बी छुट्टी पर भेज दिया जायेगा। (छुट्टी के दौरान उन्हें सिर्फ ‘मूल वेतन’ दिया जायेगा।)
1.12    ईमानदार व दागदार छवि वाले उच्चाधिकारियों की सूची सतर्कता आयोग, मानवाधिकार आयोग और नागरिक अधिकार संगठनों से मँगवायी जायेगी। (नागरिक भी ऐसे अधिकारियों की सूचना इन संस्थाओं को दे सकेंगे।)
1.13    प्रशासनिक अधिकारियों को सिर्फ प्रशासनिक विभागों का मुखिया बनाया जायेगा; दूसरे विभागों वे सिर्फ ‘प्रशासन’ का काम देखेंगे; किसी भी विभाग का मुखिया उस विभाग के विषय के किसी विशेषज्ञ को ही बनाया जायेगा- यहाँ तक कि उसका पहले से सरकारी अधिकारी होना कोई जरूरी नहीं होगा।
1.14    भारतीय राष्ट्रीय नागरिक सेवाओं (अब का आई.ए.एस.) की परीक्षाओं में उन्हीं युवाओं को शामिल होने दिया जायेगा, जिन्होंने ‘सामाजिक कार्यों’, ‘सांस्कृतिक गतिविधियों’ और ‘साहसिक अभियानों’ में भाग लिया हो। (आगे चलकर सामाजिक कार्य के रूप में बेसहारों के लिए स्थापित होने वाले आश्रयों (क्रमांक- 29.4) में ‘स्वयंसेवा’; सांस्कृतिक गतिविधियों के रूप में प्रतिवर्ष बसन्त एवं शरत् ऋतु में आयोजित होने वाले भारतीय सभ्यता-संस्कृति उत्सवों (क्रमांक- 54.6) में भागीदारी, और साहसिक अभियान के रूप में साइकिल पर देशाटन (क्रमांक- 52.4) को अनिवार्य किया कर दिया जायेगा।)
1.15    पुलिस द्वारा नागरिक या नागरिक समूह पर बल-प्रयोग करने और नागरिकों की गिरफ्तारी/हिरासत से पहले न्यायपालिका (या ‘सतर्कता-मजिस्ट्रेट’- जिक्र अध्याय- 5 में) की अनुमति अनिवार्य कर दी जायेगी।
1.16    घोषित, संगठित, भूमिगत तथा फरार अपराधियों की गिरफ्तारी या इनपर बलप्रयोग के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी; बल्कि इनके खिलाफ एक विशेष अभियान चलाकर इन सबको सलाखों के पीछे पहुँचाया जायेगा।
1.17    आग्नेयास्त्रों के लाइसेन्स अगले आदेश तक के लिए निलम्बित करते हुए वैध-अवैध सभी प्रकार के आग्नेयास्त्र जमा/जब्त किये जायेंगे- हालाँकि वैध हथियारों के मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं की जायेगी।
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