बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

अध्याय- 17: सरकारी काम-काज

17.1    निम्नलिखित नियम राष्ट्रीय सरकार के विभागों/उद्यमों/कार्यालयों पर लागू होंगे (राज्य सरकारों तथा निजी संस्थाओं को इससे मिलते-जुलते नियम अपनाने के लिए कहा जायेगा):
    (क) सरकारी कार्यालय और उद्यम वर्ष में 300 दिन काम करेंगे; सप्ताह में 6 कार्यदिवस होंगे; सोम से शुक्रवार का कार्यदिवस 6 घण्टों का होगा, जबकि शनिवार का कार्यदिवस 4 घण्टों का होगा- शनिवार का दिन मुख्यतः बकाया कामों के निपटारे, रख-रखाव, साफ-सफाई इत्यादि के लिए होगा और इसदिन एक-तिहाई उपस्थिति को ही पर्याप्त माना जायेगा।
    (ख) जरूरत पड़ने पर सरकारी ‘अधिकारी’ (एक दिन में) 2 घण्टे अतिरिक्त काम कर सकेंगे, जबकि मजदूरों और कर्मियों से (एक दिन में) निर्धारित 6 घण्टे से अधिक काम लेने पर उन्हें एक दिन का एक तिहाई वेतन दिया जायेगा। (आम तौर पर एक दिन में 2 घण्टे से अधिक अतिरिक्त काम कोई भी नहीं करेगा।)
    (ग) प्रत्यक्ष रूप से जनता की सेवा करने वाले विभाग दो शिफ्टों में (07:30 से 13:30 तथा 13:30 से 19:30 तक) काम करेंगे- इसके लिये स्टाफ भी दोगुने रखें जायेंगेः जबकि चार शिफ्टों में काम करने वाले विभागों में रात्रि शिफ्टों में काम करने पर अलग से भत्ते की व्यवस्था होगी।
    (घ) युद्ध, युद्ध की तैयारी, 8 वर्षों में एक बार होने वाले राष्ट्रीय युद्धाभ्यास (जिक्र क्रमांक- 50.7 में) तथा किसी आपात्कालीन परिस्तिथि में काम के घण्टे डेढ़ गुना तक बढ़ाये जा सकेंगे।
    (ङ) राष्ट्रीय सरकार की ओर से वर्ष में कुल 13 छुट्टियाँ प्रदान की जायेंगी, जिनमें से 5 तो तय रहेंगी- स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, होली, दशहरा और दिवाली; बाकी 8 छुट्टियों का निर्धारण विभिन्न विभागों/उद्यमों/राज्य सरकारों द्वारा स्वयं किया जायेगा।
    (च) सरकारी कर्मियों को वर्ष में कुल 60 दिनों की ‘वार्षिक’ छुट्टी दी जायेगी, जिसमें से 30 दिनों की छुट्टी को खर्च करना अनिवार्य होगा; अर्थात्, एक ‘रोस्टर’ बनाकर साल की प्रत्येक चौमाही में कर्मियों को बारी-बारी से 10 दिनों की छुट्टी पर अनिवार्य रूप से भेजा जायेगा।
    (छ) इसके अलावे वर्ष में 30 दिनों के ‘आकस्मिक’ अवकाश की भी व्यवस्था रहेगी।
    (ज) बीमारी के लिये अलग से कोई छुट्टी नहीं होगी- जबकि अस्पताल में भर्ती रहने के दिनों को ‘उपस्थित’ के रूप में दर्ज किया जायेगा।
    (झ) विभिन्न त्यौहारों को ‘प्रतिबन्धित’ अवकाश की सूची में शामिल किया जायेगा; कर्मी एक वर्ष में 10 तक ऐसे अवकाश ले सकेंगे और एक कार्यालय अपने अधिकतम 50 फीसदी कर्मियों को एकबार में यह अवकाश दे सकेंगे।
    (ञ) महिलाओं को दिया जाने वाला ‘मातृत्व’ अवकाश पहली बार 6 महीनों का तथा ‘दूसरी व अन्तिम’ बार 3 महीनों का होगा। (अन्यान्य छुट्टियों को इसके साथ जोड़कर इसे और भी लम्बा किया जा सकेगा।) (क्या इस देश में ‘तीसरे’ मातृत्व अवकाश की जरूरत है?)
    (ट) वर्ष में 200 दिन काम करने वाले श्रमिकों एवं कर्मियों को एक महीने का तथा 250 दिन काम करने वालों को दो महीने का अतिरिक्त वेतन बोनस के रूप में दिया जायेगा। (‘विश्वकर्मा सेना’ के लिये बोनस का जिक्र क्रमांक 6.10 में है।)
    (ठ) 40 की उम्र के बाद स्वस्थ एवं नीरोग रहने वाले कर्मियों/अधिकारियों को अलग से ‘चुस्ती-दुरुस्ती- Fitness- बोनस’ दिया जायेगा।
    (ड) जहाँ जरूरत होगी और जहाँ पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचेगा, वहीं मशीनीकरण, रोबोटीकरण और कम्प्यूटरीकरण को बढ़ावा दिया जायेगा, अन्यथा हाथ के काम और पारम्परिक तरीकों को ही अपनाया जायेगा।
    (ढ) प्रत्येक 100 नागरिकों पर एक-एक सफाईकर्मी, शिक्षाकर्मी, स्वास्थ्यकर्मी, सुरक्षाकर्मी तथा न्यायकर्मी की नियुक्ती की जायेगी।
    (ण) सरकारी कर्मियों को- सैन्यकर्मियों सहित, समयबद्ध प्रोन्नति और वेतनवृद्धि दी जायेगी, जिसे स्थगित, विलम्बित या समाप्त करने का अधिकार सिर्फ ‘राजकीय अदालत’ (जिक्र क्रमांक- 46.7 में) के पास (बेशक, इससे ऊपर सर्वोच्च न्यायालय के पास भी) होगा।
    (प) विवाहित सरकारी ‘अधिकारियों’ के लिये गाँव में एक वर्ष की ‘ज्ञानदूत दम्पत्ती सेवा’ अनिवार्य की जायेगी, जिसके बिना उन्हें अगली प्रोन्नति नहीं मिलेगी। (जिक्र क्रमांक- 20.7 में)
    (फ) नागरिक (‘असैनिक’) सेवाओं के कुशल/अकुशल श्रमिकों को उनके गृह थाने में; कनिष्ठ एवं मध्यम श्रेणी के कर्मियों को गृह प्रखण्ड में; उच्च श्रेणी के कर्मियों को गृह जिले में, और पर्यवेक्षकों को उनके गृह राज्य में नियुक्ति दी जायेगी; जबकि अधिकारियों को देश-विदेश कहीं भी नियुक्ति दी जा सकेगी।
    (ब) ‘गृह’ से बाहर की नियुक्ति पर कर्मियों को समुचित भत्ते दिये जायेंगे- ऐसी नियुक्तियों के लिए कर्मियों की सहमति अनिवार्य होगी।
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