बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

अध्याय- 18: भारत की नागरिकता

18.1    जो भारतीय मूल के हैं (यानि जिनके पूर्वज भारतीय हैं), जिनका जन्म भारत में हुआ है और जो भारत में ही रहकर आजीविका प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें भारत का पूर्ण या मुख्य नागरिक माना जायेगा- उन्हें भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त सभी अधिकार और सुविधायें प्राप्त होंगी और वे भारत सरकार की विधायिका, न्यायपालिका तथा सेना के अन्तर्गत उच्च एवं महत्वपूर्ण पद प्राप्त करने के योग्य होंगे।
18.2    जिन भारतीयों का जन्म भारत से बाहर हुआ है; या जिनके माता या पिता भारतीय नहीं हैं; या जिनकी पत्नी/जिनके पति का जन्म भारत से बाहर हुआ है; या जिनकी पत्नी/जिनके पति विदेशी मूल के हैं; या जो कुल मिलाकर ढाई वर्ष से अधिक समय भारत से बाहर बिता चुके हैं, उन्हें भारत सरकार के अन्तर्गत किसी उच्च या महत्वपूर्ण पद पर आसीन नहीं होने दिया जायेगा।
18.3    भारत में रहने वाले नेपाल के नागरिकों को जो सीमित भारतीय नागरिकता प्राप्त होगी, उसमें उन्हें चुनाव लड़ने का अधिकार प्राप्त नहीं होगा- हालाँकि भारत की सशस्त्र सेवाओं या नागरिक/पुलिस सेवाओं में वे पहले की तरह शामिल होते रहेंगे।
18.4    अन्य पड़ोसी देशों (जैसे कि बाँग्लादेश एवं पाकिस्तान) से बेहतर आजीविका की खोज में भारत आये नागरिकों को सामान्यतः वापस भेजा जायेगा; फिर भी, मानवीय कारणों से कुछ को अगर रहने दिया गया, तो उन्हें जो सीमित नागरिकता प्राप्त होगी- उसमें उन्हें भारत में सरकारी नौकरी में शामिल होने, जमीन या मकान खरीदने, वोट देने तथा चुनाव लड़ने का अधिकार प्राप्त नहीं होगा।
18.5    उपर्युक्त नियमों का एक अपवाद होगा- दुनिया के किसी भी हिस्से से अगर भारतीय मूल का कोई व्यक्ति या परिवार प्रताड़ित होकर भारत आता है, तो उसे न केवल शरण दिया जायेगा, बल्कि 5 वर्षों के बाद अनुरोध किये जाने पर उसे भारत की सम्पूर्ण नागरिकता भी प्रदान की जायेगी।
18.6    कोई और विदेशी अगर भारत की नागरिकता प्राप्त करना चाहे, तो उसे इसकी घोषणा करके भारत में आना या रहना होगा- उसे 5 वर्षों के बाद सीमित नागरिकता प्रदान की जायेगी- उसे भी सरकारी नौकरी में शामिल होने, जमीन या मकान खरीदने, वोट देने तथा चुनाव लड़ने का अधिकार प्राप्त नहीं होगा।
18.7    भारतीयों से विवाह करने वाले विदेशियों को जो सीमित नागरिकता प्राप्त होगी, उसमें उन्हें चुनाव लड़ने का अधिकार प्राप्त नहीं होगा।
18.8    जिन विदेशियों का जन्म भारत में हुआ है, उन्हें वयस्क होने पर उपहारस्वरूप ‘पर्यटक’ नागरिकता प्रदान की जायेगी- वे बिना वीसा एवं पासपोर्ट के इच्छानुसार समय तक भारत में एक पर्यटक की हैसियत से रह सकेंगे।
18.9    प्रवासी भारतीयों (अर्थात् जिन भारतीय मूल के लोगों की जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों भारत से बाहर है) का भारत में पंजीकरण किया जायेगा और उन्हें राज्यसभा में अपने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रतिनिधि भेजने का अधिकार प्राप्त होगा- इस प्रकार, वे अपनी बात भारतीय संसद में रख सकेंगे। (जिक्र क्रमांक- 27.1 (च) में ‘राज्यसभा’ अध्याय के अन्तर्गत।)
18.10    जो भारतीय विदेशों में रहने लगे हैं, उनके नागरिक अधिकारों में निम्न प्रकार से कटौती की जायेगी- कुल ढाई वर्ष विदेश में बिताने वालों को देश में उच्च एवं महत्वपूर्ण पद प्रदान नहीं किये जायेंगे; कुल 5 वर्ष देश से बाहर बिताने पर उनका भारत में चुनाव लड़ने का अधिकार समाप्त हो जायेगा; कुल 10 वर्ष बाहर बिताने वालों का वोट देने का अधिकार समाप्त हो जायेगा, और कुल 20 वर्ष देश से बाहर बिताने वालों का भारत में किसी भी अचल सम्पत्ती पर से अधिकार समाप्त हो जायेगा।
18.11    देश में दो प्रकार के नागरिक पहचानपत्र (अध्याय- 53) जारी किये जायेंगे- ‘भारतीय नागरिक पहचानपत्र’ तथा ‘भारतीय सीमित नागरिकता पहचानपत्र’- ये किन्हें जारी किये जायेंगे यह ऊपर के विन्दुओं से स्पष्ट है। (‘भारतीय सीमित नागरिकता पहचानपत्र’ में धारक को जो अधिकार प्राप्त "नहीं" होंगे, उनका स्पष्ट वर्णन होगा।)
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