बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

अध्याय- 25: प्रधानमंत्री का चयन

25.1    पाँच वर्षों के लिए देश के प्रधानमंत्री का चयन सीधे नागरिक करेंगे- प्रधानमंत्री वही बनेगा, जिसे देश के 50 प्रतिशत से ज्यादा नागरिकों का मत हासिल हो।
25.2    अगर पहली बार में किसी को 50 प्रतिशत से ज्यादा मत न मिले (मिलेगा भी नहीं), तो सर्वाधिक मत पाने वाले 6 उम्मीदवारों के बीच दूसरे चरण का मतदान कराया जायेगा; और अगर दूसरे चरण में भी किसी को 50 प्रतिशत से ज्यादा मत ना मिले, तो तीसरे एवं अन्तिम चरण का मतदान सर्वाधिक मत पाने वाले सिर्फ दो उम्मीदवारों के बीच होगा।
25.3    एक संयोग यह हो सकता है कि तीसरे चरण के दोनों उम्मीदवारों को 50-50 प्रतिशत मत मिल जायें- ऐसे में, दोनों को ढाई-ढाई वर्षों के लिए प्रधानमंत्री नियुक्त किया जा सकता है; या दोनों चाहें, तो संयुक्त रूप से काम कर सकते हैं।
25.4    पहले चरण में उम्मीदवारों की संख्या बहुत अधिक हो सकती है, इसे नियंत्रित करने के लिए आवश्यकतानुसार कई सामान्य उपाय अपनाये जा सकते हैं- जैसे,
    (क) उम्मीदवारों को अपना एक सुस्पष्ट ‘घोषणापत्र’ जारी करने के लिए कहा जाना, जिसमें घरेलू नीति, विदेश नीति, अर्थनीति, रक्षानीति इत्यादि पर उनके विचार हों,
    (ख) उन्हें देश की जनसंख्या के 0.001 प्रतिशत नगरिकों का ‘समर्थन-हस्ताक्षर’ संलग्न करने के लिए कहा जाना- नामांकन पत्र के साथ; इत्यादि।
25.5    पहले चरण के उम्मीदवारों को "चुनाव-क्रमांक" आबण्टित किये जायेंगे, जबकि दूसरे और तीसरे चरण के चुनाव के लिए "चुनाव-चिह्न" ही आबण्टित किये जायेंगे।
25.6    जाहिर है, इसके लिए ई.वी.एम. में 0 से 9 तक कुल दस "संख्या बटन" तथा कुल छह "चिह्न बटन" अंकित करने होंगे। (पहले चरण में "चिह्न वाले बटन" ढके हुए रहेंगे, तो दूसरे-तीसरे चरण में "संख्या वाले बटन" ढके रहेंगे।)
25.7    शपथ लेने से पहले प्रधानमंत्री अपने राजनीतिक, या गैर-राजनीतिक, सामाजिक-सांस्कृतिक दल/संस्था की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देगा।
25.8    अगर वह किसी नौकरी से जुड़ा है, तो शपथग्रहण से पहले नौकरी देने वाली संस्था उसे प्रधानमंत्री बनने के लिए ‘विशेष छुट्टी’ प्रदान करेगी। (जाहिर है, प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद वह न केवल अपने राजनीतिक/अराजनीतिक दलों से फिर से जुड़ सकेगा, बल्कि अपनी छोड़ी हुई नौकरी भी उसे दुबारा मिल सकेगी।)
25.9    प्रधानमंत्री अपने मंत्रीमण्डल का गठन तो करेगा ही, साथ ही, भूमिका में जिस मंत्री-परिषद (‘चाणक्य सभा’) का जिक्र हुआ है, उसे भी एक "मार्गदर्शक" संस्था के रूप में कायम रख सकता है और इसके सदस्यों के चयन के लिए भी एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनायी जा सकती है, जैसे कि- जनमत सर्वेक्षण।

    मुख्यमंत्रियों का चयन (9वें वर्ष में)

25.10    राज्यों के लिए मुख्यमंत्रियों का चयन भी इसी प्रकार से होगा- अर्थात् राज्य की 50 प्रतिशत से जनता जिसे चुनेगी, वही राज्य का मुख्यमंत्री बनेगा।

(टिप्पणीः जाहिर है, पिछले अध्यायों में जनसंसद के सदस्यों, विधायकों, सांसदों तथा प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के चुनाव के लिए जिस तरह की बातें कही गयी हैं, उसके लिए चुनाव व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाना होगा, जिसका जिक्र अगले अध्याय ‘चुनाव-व्यवस्था’ के अन्तर्गत किया जा रहा है।)
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