बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

अध्याय- 26: चुनाव-व्यवस्था

26.1    चुनाव आयोग में बड़ी संख्या में पूर्णकालिक कर्मियों की नियुक्ति की जायेगी।
26.2    ‘बहुद्देशीय राष्ट्रीय नागरिक पहचानपत्र’ (विस्तृत व्याख्या अध्याय- 53 में) बनाने तथा उसके नवीणीकरण की जिम्मेवारी भी चुनाव आयोग को ही सौंपी जायेगी, जिसके लिए प्रखण्ड/नगर/उपमहानगर स्तर पर उसके कार्यालय होंगे।
26.3    प्रत्येक पंचायत एवं वार्ड में चुनाव आयोग के "पूर्णकालिक" मतदान केन्द्र होंगे, जिसमें लगे अत्याधुनिक वोटिंग मशीनें न केवल कम्प्यूटर से, बल्कि जिला/राज्य-स्तरीय/राष्ट्रीय ‘मतगणना केन्द्रों’ से भी जुड़ी होंगी। (ध्यान रहे, प्रखण्ड/नगर/उपमहानगर स्तर के जनसंसदों के चुनाव प्रतिवर्ष हुआ करेंगे।)

    नकारात्मक मतदान

26.4    देश के ‘पढ़े-लिखे’ मतदाताओं को ‘नकारात्मक मतदान’ का "विशेष मताधिकार" प्राप्त होगा, जिसके तहत मतदान केन्द्रों में ‘सफेद मतदान मशीन’ के बगल में ‘काले रंग की नकारात्मक मतदान मशीन’ भी रखी होगी।
26.5    जाहिर है कि नकारात्मक मतदान की प्रक्रिया का प्रचार-प्रसार नहीं किया जायेगा, बल्कि मशीन की स्क्रीन पर आने वाले निर्देशों को ‘पढ़कर’ इस मतदान को किया जा सकेगा- इस प्रकार, सिर्फ शिक्षित मतदाता ही इसका प्रयोग कर सकेंगे।
26.6    नकारात्मक मतदान का ‘कारण’ भी पूछा जायेगा, जिसके जवाब में दिये गये विकल्पों (जैसे, मतदाता उम्मीदवार को भ्रष्ट, या बाहुबली, या चरित्रहीन इत्यादि में से क्या मानता है) में से किसी एक को चुनना होगा; या फिर, अपना एक कारण टाईप करना होगा।
26.7    चुनाव आयोग ‘नकारात्मक मतदान’ के परिणाम को न्यायपालिका के पास निम्न सिफारिश के साथ भेजेगाः 10 प्रतिशत ‘नकारात्मक’ वोट पाने वाले उम्मीदवार को 5 वर्षों के लिए; 20 प्रतिशत पाने वालों को 10 वर्षों के लिए; 30 प्रतिशत पाने वालों को 15 वर्षों के लिए; 40 प्रतिशत पाने वालों को 20 वर्षों के लिए, और 50 प्रतिशत ‘नकारात्मक’ वोट पाने वाले उम्मीदवार को जीवन भर के लिए भारतीय (चुनावी) राजनीति से दूर कर दिया जाय।
26.8    अब यह न्यायपालिका पर निर्भर करेगा कि वह सिफारिश के आधार पर उम्मीदवार राजनेताओं को राजनीति से दूर रखने का निर्णय लेती है, या नहीं लेती है। (‘नकारात्मक मतदान’ की सुविधा के बाद क्या ‘राईट टू रीकॉल’-जैसी किसी जटिल प्रक्रिया की जरूरत रह जायेगी?)

    बाध्यतायें

26.9    पंचायत/वार्ड के प्रतिनिधि (यानि जनसंसद के सदस्य) बनने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 25 वर्ष; विधायक बनने के लिए 30 वर्ष; सांसद बनने के लिए 35 वर्ष; मुख्यमंत्री के लिए 40 वर्ष; प्रधानमंत्री बनने के लिए 45 वर्ष, तथा राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति बनने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 50 वर्ष निर्धारित किया जायेगा।
26.10    इसी प्रकार, न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को भी अनिवार्य बनाया जायेगाः पंचायत/वार्ड का प्रतिनिधि बनने के लिए 8वीं पास; विधायक बनने के लिए 10वीं पास; सांसद बनने के लिए इण्टर (12वीं) पास; मुख्यमंत्री के लिए स्नातक (बैचेलर डिग्री); प्रधानमंत्री बनने के लिए स्नातकोत्तर (मास्टर डिग्री), तथा राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति बनने के लिए डॉक्टरेट डिग्री। (जाहिर है कि किसी विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की गयी "मानद" (बैचलर, मास्टर और डॉक्टरेट) उपाधि को भी स्वीकार किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसी डिग्रियों को प्रदान करने के लिए एक ‘आधार’ जरूर होना चाहिए।)
26.11    दो से अधिक बच्चों के माता-पिता को चुनाव नहीं लड़ने दिया जायेगा। (इस बाध्यता पर भविष्य में पुनर्विचार किया जा सकता है, जब यह साबित हो जाय कि देश में जनसंख्या वृद्धि की दर सामान्य हो गयी है।)
26.12    अगर किसी परिवार के 2 सदस्य पहले से सक्रिय राजनीति में हों, तो उस परिवार के तीसरे सदस्य को चुनाव नहीं लड़ने दिया जायेगा। 
26.13    राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति के लिए अधिकतम 2 कार्यकल; प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री के लिए अधिकतम 3 कार्यकाल; सांसदों एवं विधायकों के लिए 4 तथा जनसंसद के सदस्यों के लिए अधिकतम 5 कार्यकाल (इनका एक कार्यकाल 3 साल का होगा) तय किया जायेगा।
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