बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

अध्याय- 31: स्वास्थ्य

31.1    ‘जन स्वच्छता’ (नाली, शौचालाय, स्नानागार इत्यादि) की जिम्मेवारी ग्राम पंचायतों, वार्ड/नगर/महानगर परिषदों को सौंपी जायेगी।
31.2    ‘जन स्वास्थ्य’ (टीकाकरण आदि) की जिम्मेवारी राज्य सरकारों की होगी। (हालाँकि जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय सरकार मदद करेगी।)
31.3    ‘जन चिकित्सा’ (बड़े ईलाज, ऑपरेशन इत्यादि) की जिम्मेवारी राष्ट्रीय सरकार उठायेगी। (राज्य सरकार चाहे, तो अपनी समानान्तर चिकित्सा व्यवस्था कायम कर सकती है।)
31.4    जन चिकित्सा के अंतर्गत पंचायत/वार्ड स्तर पर ‘चिकित्सालय’, प्रखण्ड/नगर/उपमहानगर स्तर पर ‘अस्पताल’ और जिला/महानगर स्तर पर ‘बड़े अस्पताल’ स्थापित किये जायेंगे।
31.5    इन चिकित्सालय और अस्पतालों में निम्न आयवर्ग के मरीजों से सामान्य ईलाज का 5 प्रतिशत, मध्यम आयवर्ग वालों से 50 प्रतिशत और उच्च आयवर्ग वाले मरीजों से ईलाज का 90 प्रतिशत शुल्क लिया जायेगा।
31.6    उपर्युक्त शुल्क के भुगतान के लिए कोई दवाब नहीं होगा- मरीजों/उनके परिजनों को एक ‘खाता संख्या’ के साथ बिल थमाया जायेगा और यह कहा जायेगा कि वे स्वयं ही इस खाते में- जब चाहें, तब- शुल्क जमा करवा दें। (यह एक तरह से नागरिकों में ईमानदारी और जिम्मेदारी की भावना का ‘लिटमस टेस्ट’ होगा।)
31.7    बड़े, महँगे एवं प्राण-रक्षा से जुड़े ईलाज या ऑपरेशन का शत-प्रतिशत खर्च राष्ट्रीय सरकार उठायेगी। (अगर कोई समर्थ नागरिक या संस्था चाहे, तो ऐसे ईलाजों का खर्च वहन कर सकेगी।)
31.8    इन चिकित्सालय और अस्पतालों में आयुर्वेद और होम्योपैथ के भी विभाग होंगे।
31.9    योगासन, प्राकृतिक चिकित्सा, एक्यूप्रेशर-जैसी प्राकृतिक, सुरक्षित एवं सस्ती विधाओं से लोगों का ईलाज करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को राष्ट्रीय सरकार द्वारा पंजीकृत कर उन्हें नियमित अनुदान देने की व्यवस्था की जायेगी।
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