बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

अध्याय- 34: खेल-कूद

34.1    राष्ट्रीय स्तर की खेल-कूद प्रतियोगितायें हर दूसरे वर्ष आयोजित होंगी- ओलिम्पिक और एशियाड वाले वर्षों को छोड़कर।
34.2    खिलाड़ियों को बाकायदे सरकारी वेतन दिया जाएगा, जिसका जिक्र अध्याय- 8 (नये सरकारी वेतनमान का खाका) में किया गया है। (10-12 वर्षों के सक्रिय खेल-जीवन के बाद उन्हें खेल-प्रशिक्षक के रूप में या वेतनमान के अनुरूप सामान्य नौकरियों में समायोजित कर लिया जाएगा।)
34.3    1928 से भूतपूर्व राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय/ओलिम्पिक खिलाड़ियों को 20 वर्षों का वेतन एकमुश्त धनराशी के रूप में दिया जाएगा; जो खिलाड़ी जीवित नहीं हैं, उनके वारिसों के बीच यह राशि वितरित की जाएगी।
34.4    खेल-कूद को समर्पित भूतपूर्व खिलाड़ियों की एक स्वायत्त राष्ट्रीय खेल-कूद समिति के अधीन रखा जाएगा- इस समिति में उन्हीं पूर्व खिलाड़ियों को रखा जाएगा, जो कम-से-कम एक बार ओलिम्पिक में; या दो बार एशियाड में; या फिर, तीन बार राष्ट्रीय खेलों में सम्मानजनक प्रदर्शन कर चुके हों।
34.5    जिला स्तर पर हर चौथे साल खेल-कूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जिसमे विद्यालयों के अलावे स्थानीय संघ भी भाग लेंगे और इसके परिणाम राष्ट्रीय खेल-कूद समिति के पास भेजे जायेंगे- ताकि प्रतिभावान खिलाड़ियों का सीधा चयन कर उन्हें खेल महाविद्यालयों में भेजा जा सके।
34.6    जिला स्तर के इस खेल-कूद आयोजन में अलग से एक-दो दिनों का समय देशी/देहाती किस्म के भारतीय  खेलों के लिए भी रखा जायेगा।
34.7    कोशिश की जायेगी कि एक राज्य के अन्दर लगभग सभी प्रकार की खेल सुविधायें उपलब्ध हों- इसके लिए राज्य के प्रत्येक जिले में एक-एक ‘खेल-गाँव’ बसाया जायेगा। (एक जिले में अगर ट्रैक एण्ड फील्ड की सुविधा होगी, तो दूसरे में वाटर स्पोर्ट्स की, तीसरे में फुटबॉल और हॉकी की... इसी प्रकार।)
34.8    राष्ट्रीय सरकार चूँकि क्रिकेट खेल को प्रोत्साहन नहीं देगी, इसलिए जरूरत पड़ने पर क्रिकेट के स्टेडियमों को अन्यान्य खेलों के मैदान में बदल दिया जायेगा।
34.9    अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने के लिए छहों अंचलों में एक-एक खेल महाविद्यालय स्थापित किये जायेंगे। (जाहिर है, इन छहों के बीच दोस्ताना प्रतियोगितायें भी आयोजित होंगी।)
34.10    स्थानीय किशोर एवं युवा संघों को राष्ट्रीय खेल-कूद समिति की ओर से रियायती दरों पर व्यायामशाला तथा खेल-कूद के उपकरण मुहैया कराये जायेंगे।
34.11    खो-खो और कबड्डी जैसे भारतीय खेलों का सभी देशों में प्रदर्शन कर इन्हें अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने की कोशिश की जाएगी- देश के अन्दर विद्यालयों में तो इसे अपनाया जायेगा ही।
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