बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

अध्याय- 39: चित्रवाणी और आकाशवाणी

    चित्रवाणी

39.1    चित्रवाणी, अर्थात टेलीविजन का प्रसारण दिन में 5 घण्टों के लिए सीमित कर दिया जाएगा। (सभी चैनल अपने कार्यक्रमों को इण्टरनेट पर हर वक्त उपलब्ध रख सकते हैं।)
39.2    प्रसारण के पाँच घण्टों का निर्धारण इस प्रकार हो सकता है- सुबह 7 से 8 बजे तक, दोपहर 2 से 3 बजे तक और शाम/रात 7 से 10 बजे तक।
39.3    सभी चैनलों को वर्ष में 100 घण्टों का अतिरिक्त समय भी दिया जाएगा, जिसका इस्तेमाल वे अपनी मर्जी के मुताबिक कर सकेंगे।
39.4    समाचार आधारित चैनलों को प्रति घण्टे कुछ मिनटों के प्रसारण का अधिकार होगा, मगर कुल समय उनका भी अन्यान्य चैनलों जैसा ही होगा- 5 घण्टे प्रतिदिन और वर्ष में 100 घण्टे अतिरिक्त।
39.5    कार्यक्रम रोक कर विज्ञापन दिखलाने वाले चैनलों को अनिवार्य रूप से ‘फ्री टू एयर’ बनाया जाएगा।
39.6    जहाँ तक सरकारी चैनलों की बात है, राज्य सरकारों के प्रसारण राज्य की भाषाओं में, राष्ट्रीय प्रसारण हिन्दी में, भारतीय उप-महाद्वीप के लिए प्रसारण पड़ोसी देशों की भाषाओं में और अन्तरराष्ट्रीय प्रसारण अंग्रेजी में होगा।

    आकाशवाणी

39.7    आकाशवाणी देशभर में निम्न 12 प्रवाहों (चैनलों) के प्रसारण की व्यवस्था करेगा- 1. भक्ति संगीत 2. शास्त्रीय संगीत 3. लोकगीत/अर्द्धशास्त्रीय/सुगम संगीत/गजल इत्यादि 4. वाद्य संगीत 5. फिल्मी संगीत (1970 तक) 6. फिल्मी संगीत (1971 से 2000 तक) 7. फिल्मी संगीत (2001 से) 8. विविध भारती 9. उर्दू और नेपाली सर्विस 10. राज्य प्रसारण 11. स्थानीय (एफ एम) चैनल और 12. समाचार, ज्ञान-विज्ञान इत्यादि।
39.8    इन चैनलों को सुनने के लिये खास रेडियो सेट भी आकाशवाणी की ओर से बाजार में उतारे जायेंगे, जिसके ट्यूनर घड़ी के डायल के समान उपर्युक्त बारह चैनलों को दिखायेंगे।
39.9    ये रेडियो सेट कई मॉडलों में हो सकेंगेे- जैसे, ‘कलमी’ (कलम के समान, ईयरफोन के साथ); ‘जेबी’ (जेब में रखने योग्य); ‘मेजी’ (मेज पर रखने लायक); ‘दीवारी’ (दीवार पर टाँगने लायक, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर दफ्तरों तथा रेस्तोराओं में किया जायेगा) और ‘भीमा’ (विशालकाय सेट)।
39.10    उपर्युक्त बारह चैनलों का प्रसारण (श्रोताओं की माँग पर) छह से चौबीसों घण्टों तक जारी रह सकेगा।

    उभयनिष्ठ

39.11    आकाशीय तरंगों के माध्यम से इस देश में क्या दिखाया/सुनाया जाय और क्या नहीं, यह तय करने के लिए बुद्धिजीवियों, वरिष्ठ संस्कृति-कर्मियों और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक स्वायत्त राष्ट्रीय समिति बनायी जाएगी।
39.12    ‘टावरों’ के जंगल को नियंत्रित करने के लिए प्रत्येक प्रखण्ड/नगर/उप-महानगर में एक मास्टर टावर का निर्माण किया जाएगा, जिसमे पर्याप्त ‘शिखर’ होंगे- आबादी के बीच खड़े सभी टावरों को हटा लिया जाएगा।

    सोशल-मीडिया

39.13    सोशल-मीडिया पर सरकार की ओर से किसी तरह के रोक-टोक या नियंत्रण की कोशिश नहीं होगी- जरूरत पड़ने पर उपर्युक्त (39.11) समिति को ही कुछ दिशा-निर्देश जारी करने के लिए कहा जा सकता है; इससे आगे की कार्रवाई न्यायपालिका के हाथों में होगी।
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