शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2016

अध्याय- 7: सरकारी खर्च

7.1    एक नया सरकारी वेतनमान तैयार किया जायेगा, जिसमें न्यूनतम व अधिकतम वेतन-भत्तों-सुविधाओं के बीच 15 गुना से ज्यादा का अन्तर नहीं रहने दिया जायेगा। (एक मजदूर को अगर प्रतिमाह 10,000 रुपये वेतन, 3000 रुपये भत्ता तथा रहने के लिये 500 वर्गफीट का मकान मिलता है, तो राष्ट्रपति महोदय को प्रतिमाह 1,50,000 रुपये वेतन, 45,000 रुपये भत्ता तथा रहने के लिये अधिकतम 7,500 वर्गफीट का मकान मिलेगा।)
7.2    वर्तमान‘राष्ट्रपति भवन’ (गुलामी के दिनों का ‘वायसराय हाउस’) को ‘राष्ट्रीय अतिथिशाला’ का रूप दिया जा सकता है, जहाँ दूसरे देशों से आने वाले राजकीय अतिथियों को ठहराया जायेगा।
7.3    पाँच वर्ष तक विधायक/सांसद या जनसंसद (जिक्र अध्याय- 21 में आयेगा) का सदस्य रहने वाले जनप्रतिनिधियों को उनके वेतन का 30 प्रतिशत तथा दस वर्ष तक जनप्रतिनिधि रहने वालों को 40 प्रतिशत पेन्शन के रूप में दिया जायेगा; जबकि, पन्द्रह वर्ष या इससे अधिक समय तक जनप्रतिनिधि रहने वालों को ही उनके वेतन का 50 प्रतिशत पेन्शन के रूप में दिया जायेगा।
7.4    ‘अँगरक्षा’ की माँग करने वाले राजनेताओं और उनके परिजनों को किसी एक ‘दुर्ग’ के अन्दर ‘सामूहिक’ अँगरक्षा प्रदान की जायेगी- हालाँकि यह व्यवस्था बिलकुल मुफ्त नहीं होगी- यानि उन्हें कुछ काम भी करने के लिये दिये जायेंगे।
7.5    अँगरक्षा वाले खास ‘दुर्ग’ के बाहर किसी को भी विशेष अँगरक्षा प्रदान नहीं की जायेगी; और अगर यह दी जायेगी, तो उसका पूरा खर्च वसूला जायेगा।
7.6    ‘सभी स्तरों’ पर ‘हल्की’ सरकारी गाड़ियों की संख्या में 50 प्रतिशत कटौती की जायेगी।
7.7    सेनाओं को उनके ‘दैनिक’ युद्धाभ्यासों के दौरान पेट्रो-पदार्थों की खपत में 33 से 66 प्रतिशत तक कटौती करने के लिये कहा जायेगा। (युद्धाभ्यास की भरपाई के लिये 8 वर्षों में एक बार ‘राष्ट्रीय युद्धाभ्यास’ की योजना क्रमांक- 50.7 में प्रस्तुत की जा रही है, जिसमें नागरिक भी शामिल होंगे।)
7.8    आम जनता को सीधे तौर पर रोजगार न दिलाने वाली महँगी परियोजनाओं को- देश के खुशहाल बनने तक- स्थगित किया जायेगा।
7.9    बेकार साबित हो चुके मंत्रालय, विभाग, योजना, परियोजनाओं को बन्द किया जायेगा और अनावश्यक अनुदान, राज-सहायता, समारोह, विज्ञापन, पुरस्कार राशि, विदेश दौरों इत्यादि पर भी रोक लगायी जायेगी।
7.10    गणतंत्र दिवस के परेड-जैसे खर्चीले समारोह 5 वर्षों में एक बार आयोजित किये जायेंगे।
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