बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

अध्याय- 9 रुपये का मूल्य

9.1    निर्यात को सरकारी प्रोत्साहन/संरक्षण न देकर; विलासिता की वस्तुओं की आयात पर कर बढ़ाकर; विश्व बैंक आदि की गुलामी को त्यागकर (क्रमांक 10.3) तथा आर्थिक विशेषज्ञों से सलाह लेकर रुपये के ‘मूल्य’ को 1980 या 1960 के स्तर पर (हो सका, तो 1940 के स्तर पर) पहुँचाने की कोशिश की जायेगी।
9.2    रुपये का मूल्य बढ़ाने के लिए अगर ‘स्वर्ण भण्डार’ में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ी, तो उसके लिए दो उपाय अपनाये जायेंगे-
(क) देश भर में विशेष अभियान चलाकर लॉकरों तथा घरों से कालेधन के रूप में जमा सोने को जब्त कर उसे सरकारी स्वर्णभण्डार तक पहुँचाया जायेगा (क्रमांक 10.5 में ‘लॉकर’ की व्यवस्था या इनकी ‘गोपनीयता’ समाप्त करने की बात कही जा रही है);
(ख) समृद्ध मन्दिरों/ट्रस्टों से अनुरोध किया जायेगा कि वे अपने स्वर्णभण्डार का 33 प्रतिशत अंश देश के नाम कर दें (इस अंश को स्थानान्तरित नहीं किया जायेगा, बल्कि मन्दिर/ट्रस्ट के ही भण्डार में अलग कक्ष या ट्रंक में रखवा दिया जायेगा)।
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