अगर नेताजी सुभाष “दिल्ली पहुँच” जाते, तो जो तीन काम वे सबसे पहले करते, वे होते- 1. “औपनिवेशिक” शासन व्यवस्था को पूरी तरह से हटाकर समाजवादी किस्म की एक भारतीय व्यवस्था कायम करना, 2. देश के गद्दारों को राजनीति की मुख्यधारा से अलग करना (शायद वे उन्हें निर्वासित ही कर देते) और 3. भारतीय प्रशासन, पुलिस एवं सेना के सिर से “ब्रिटिश हैंग-ओवर” का भूत (अधिकारियों द्वारा जनता एवं मातहतों को गुलाम समझने की मानसिकता) उतारना। इसके बाद वे निम्न पाँच काम करते- 1. दस (या बीस) वर्षों के अन्दर हर भारतीय को सुसभ्य, सुशिक्षित, सुस्वस्थ एवं सुसंस्कृत बनाना, 2. हर हाथ को रोजगार देते हुए दबे-कुचले लोगों के जीवन स्तर को शालीन बनाना, 3. गरीबी-अमीरी के बीच की खाई को एक जायज सीमा के अन्दर नियंत्रित रखना, 4. देशवासियों को राजनीतिक रूप से इतना जागरूक बनाना कि शासन-प्रशासन के लोग उन पर हावी न हो सकें और 5. प्रत्येक देशवासी के अन्दर “भारतीयता” के अहसास को जगाना। इसके बाद ही वे नागरिकों के हाथों में “मताधिकार” का अस्त्र सौंपते। देखा जाय, तो यह अवधारणा आज भी प्रासंगिक है और इसी आधार पर यह दसवर्षीय “भारतीय राष्ट्रीय सरकार” का घोषणापत्र प्रस्तुत किया जा रहा है।

शुक्रवार, 5 अप्रैल 2024

2. अलगाववाद, आतंकवाद तथा भेद-भाव के खिलाफ

 अलगाववाद

2.1  देश के नागरिक क्षेत्रोंमें तैनात सैनिकों/अर्द्धसैनिकों को वापस बैरकों में बुला लिया जायेगा- चाहे वे क्षेत्र मणिपुर के हों या काश्मीर के, या देश के किसी भी हिस्से के।

2.2  देश के सभी अलगाववादी, अतिवादी एवं हथियारबन्द समूहों के खिलाफ पुलिस/सैन्य कार्रवाई स्थगित करते हुए उनसे यह पूछा जायेगा कि वे भारत-भारतीय-भारतीयता के प्रति सम्मान एवं प्रेम की भावना रखते हैं या नहीं- ?

2.3  जिन समूहों का उत्तर हाँमें होगा, उनके नेताओं से बातचीत की जायेगी और संविधान के नीति-निदेशक तत्वों तथा प्रस्तुत घोषणापत्र की घोषणाओं के दायरे में— जहाँ तक सम्भव होगा— उनकी माँगों को मान लिया जायेगा।

2.4  जिन समूहों का उत्तर नहींमें होगा, या जो उत्तर नहीं देंगे, उनपर प्रतिबन्ध लगाया जायेगा और उनके खिलाफ यथोचित कार्रवाई की जायेगी।

 

आतंकवाद

2.5  आतंकवाद के खिलाफ एक एकीकृत कमान का गठन किया जायेगा, जिसके अन्दर गुप्तचर विभाग, कमाण्डो बल तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट इत्यादि होंगे- इस प्रकार, अपनी खुद की सुरक्षा/प्रतिरक्षा व्यवस्था, सूचना तंत्र तथा आतंकवादियों को सजा देने की व्यवस्था को चाक-चौबन्द एवं चुस्त-दुरुस्त बनाया जायेगा।

2.6  आतंकवादियों के साथ कभी भी, किसी भी कीमत पर बातचीत या समझौता नहीं करने की नीति अपनायी जायेगी।

 

भेद-भाव

2.7  चूँकि राष्ट्रीय सरकार अपने सभी नागरिकों को एक समान मानेगी, अतः जो कोई भी अपने विचारों या कार्यों से देश के अन्दर जन्म, धर्म, लिंग, रंग, भाषा, क्षेत्र इत्यादि के आधार पर किसी भी तरह का भेद-भाव, ऊँच-नीच, उन्माद, वैमनस्य इत्यादि पैदा करने की कोशिश करेगा— वह बाद में अगर क्षमायाचना करता है— तो उसे पहली बार में चेतावनी, दूसरी बार में जुर्माने तथा तीसरी बार में 3 महीनों के निर्वासनकी सजा दी जायेगी और अगर वह क्षमायाचना से इन्कार करता है और अपने दकियानूसी एवं कट्टरपन्थी विचारों पर कायम रहता है, तो उसे पहली बार में ही निर्वासनकी सजा दी जायेगी, जो उसके द्वारा क्षमायाचना करने तक जारी रहेगी।

2.8  कहने की आवश्यकता नहीं, निर्वासन के लिए या तो अण्डमान-निकोबार द्वीपसमूह के एक निर्जन टापू को चुना जायेगा, जहाँ जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं उपलब्ध रहेंगी— पर्यावरण को नुकसान पहुँचाये बिना; या फिर, अण्डमान सागर में किसी पुराने जलजहाज को जेलखाने का रूप दिया जायेगा।

3. ‘भ्रष्ट-चौकड़ी’ का निर्वासन

 3.1  अण्डमान में 4 या अधिक विशेष न्यायालयों की स्थापना कर (क) राजनेताओं, (ख) उच्चाधिकारियों, (ग) पूँजीपतियों तथा (घ) माफिया सरगनाओं से जुड़े भ्रष्टाचार-सम्बन्धी तथा आपराधिक मामलों को वहाँ स्थानान्तरित किया जायेगा।

3.2  इन मामलों के अभियुक्तों को भी वहाँ नजरबन्द (माफिया के मामले में कैद) किया जायेगा।

3.3  प्रत्येक विशेष न्यायालय में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त तीन वरिष्ठ न्यायाधीश एक-एक ज्यूरी की मदद से इन मामलों की सुनवाई करेंगे।

3.4  अखबारों तथा सोशल मीडिया पर बेबाक, पूर्वाग्रहरहित एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ अपने विचार रखने वाले जागरूक नागरिकों का चयन ज्यूरी के सदस्यों के रूप में किया जायेगा। (इसके लिए पूर्व-न्यायाधीशों की एक समिति बनायी जायेगी, जो ऐसे नागरिकों द्वारा विगत एक वर्ष के दौरान लिखे गये आलेखों का अध्ययन करने के बाद उनका चयन ज्यूरी के सदस्य के रूप में किया करेगी।)

3.5  संक्षिप्त सुनवाई के बाद ज्यूरी के कम-से-कम 7 सदस्यों तथा 2 न्यायाधीशों द्वारा दोषी समझे गये अभियुक्तों को 12 वर्षों के लिये निकोबार के एक टापू पर निर्वासित जीवन बिताने के लिये भेज दिया जायेगा- बेशक, उनके नागरिक अधिकारों को निलम्बित करते हुए।

3.6  जाहिर है, निर्दोष साबित होने वाले अभियुक्तों को बाइज्जत बरी किया जायेगा।

3.7  इन अदालतों में अधिकतम 2 वषों के अन्दर फैसले का आना अनिवार्य होगा।

3.8  इस विशेष अदालत के सामने आत्म-समर्पण न करने वाले (राजनेता, उच्चाधिकारी, पूँजीपति) अभियुक्तों को न केवल नागरिक सुविधाओं (पानी, बिजली, फोन, बैंकिंग, ड्राइविंग इत्यादि) से वंचित कर दिया जायेगा, बल्कि उनकी जान-माल की रक्षा का दायित्व लेने से भी राष्ट्रीय सरकार इन्कार कर देगी।

3.9  इसी प्रकार, जो माफिया सरगना आत्म-समर्पण नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कमाण्डो दस्तों को उतारा जायेगा और जाहिर है कि इस कमाण्डो कार्रवाई में उनकी जान जाने की ही आशंका ज्यादा रहेगी।

(टिप्पणीः बिना पर्यावरण को नुकसान पहुँचाये निकोबार द्वीपसमूह के किसी एक टापू पर जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की व्यवस्था की जायेगी, जहाँ निर्वासन काटा जा सके; या फिर, वहीं पर किसी पुराने बड़े जलजहाज को जेलखाने का रूप दिया जायेगा।)

4. उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार नियंत्रण

 4.1  पुलिस, प्रशासन, सेना/अर्द्धसैन्य बल, न्यायपालिका तथा विधायिका के अन्दर उच्च एवं सर्वोच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों के आचरण पर नजर रखने के लिए ‘भारतीय राष्ट्रीय लोकपाल सेवा’ का गठन किया जायेगा, जिसकी निम्न विशेषताएं होंगीः

(क) प्रारम्भ में पुलिस, प्रशासन, सेना/अर्द्धसैन्य बल, न्यायपालिका तथा विधायिका से एक-एक बेदाग चरित्र वाले अवकाशप्राप्त नागरिकों को लेकर इस संस्था का गठन किया जायेगा।

(ख) इस संस्था में मुख्य लोकपालोंकी संख्या तो पाँच ही रहेगी, मगर उनके नीचे लोकपालों का एक कार्यबल होगा, जिसमें 21 से 101 तक सदस्य (व्यस्तता के आधार पर) हो सकेंगे।

(ग) पुलिस, प्रशासन, सेना/अर्द्धसैन्य बल, न्यायपालिका तथा विधायिका के सर्वोच्च एवं उच्च पदाधिकारियों एवं राजनेताओं के आचरण पर यह संस्था नजर रखेगी तथा उनके आचरण से सम्बन्धित तथ्यों, आँकड़ों, सबूतों का संकलन एवं विश्लेषण करेगी।

(घ) नागरिक अपनी ओर से भी अपने नाम के साथ या गुमनाम रहकर ऐसी जानकारियाँ भेज सकेंगे; साथ ही, जरूरत पड़ने पर लोकपाल सेवा द्वारा जनमत-सर्वेक्षणभी करवाया जा सकेगा।

(ङ) प्रत्येक राज्य में भी लोकपाल सेवा की एक-एक इकाई होगी, जो राज्यों के सर्वोच्च एवं उच्च पदाधिकारियों के आचरण पर नजर रखेगी।

(च) थाना स्तर पर इस प्रकार की जो इकाई होगी, उसे लोकपाल सेवा न कहकर अगले अध्याय में सतर्कता-मजिस्ट्रेटकहा जा रहा है— ये मजिस्ट्रेट आम तौर पर जन-शिकायतों का निवारण करते हुए निचले स्तर पर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का काम करेंगे।

(छ) ‘भारतीय राष्ट्रीय अन्वेषण ब्यूरो’ (आज की सी.बी.आई. के स्थान पर गठित होने वाली नयी संस्था), राज्यों के अन्वेषण ब्यूरो तथा अन्यान्य सभी सरकारी जाँच एजेन्सियाँ उपर्युक्त लोकपाल संस्था के निर्देशानुसार कार्य करेंगी।

(ज) यह संस्था प्रतिवर्ष अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी, जिसमें अच्छा आचरण रखने, कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करने तथा नागरिकों/मातहतों की आकांक्षाओं पर खरे उतरने वाले पदाधिकारियों एवं राजनेताओं के नाम सफेद सूचीमें दर्शाये जायेंगे।

(झ) इसके विपरीत, खराब आचरण रखने, कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने तथा नागरिकों/मातहतों को परेशान करने वाले अधिकारियों एवं राजनेताओं के नाम काली सूचीमें दर्शाये जायेंगे।

(ञ) जिन अधिकारियों एवं राजनेताओं के बारे में यह आशंका होगी कि वे किसी किस्म के भ्रष्टाचार या अपराध में लिप्त हैं, उनके नाम लाल सूचीमें दर्ज किये जायेंगे।

(ट) बाकी बचे सर्वोच्च/उच्च पदाधिकारियों एवं राजनेताओं को अपने-आप भूरी सूचीमें दर्ज मान लिया जायेगा।

(ठ) सफेद सूचीमें लगातार 3 बार, या कुल-मिलाकर 5 बार दर्ज होने वाले अधिकारियों एवं राजनेताओं को 5 वर्षों के लिए लोकपाल सेवा में शामिल किया जा सकेगा।

(ड) इसके विपरीत, ‘काली सूचीमें लगातार 3 बार, या कुल-मिलाकर 5 बार दर्ज होने वालों को (सरकार द्वारा) तत्काल प्रभाव से 5 वर्षों के लिए निलम्बित कर दिया जायेगा— जाहिर है कि अगर वह राजनेता है, तो 5 वर्षों तक वह सक्रिय राजनीति में भाग नहीं ले सकेगा।

(ढ) लाल सूचीमें दर्ज होने वालों को सूची प्रकाशित होने 24 घण्टों के अन्दर किसी एक राष्ट्रीय जाँच एजेन्सी द्वारा 90 दिनों के लिए हिरासत में लिया जायेगा, उन पर लगे आरोपों की जाँच की जायेगी और आवश्यकतानुसार आरोपपत्र दाखिल किये जायेंगे।

(ण) बाकी की कार्रवाई अण्डमान स्थित विशेष न्यायालय में चलेगी- जैसा कि पिछले अध्याय में जिक्र हो चुका है।

(त) इस मामले में सिर्फ राष्ट्रपति महोदय, प्रधानमंत्री, सर्वोच्च न्यायाधीश तथा मुख्य चुनाव आयुक्त को थोड़ी राहत दी जायेगी— राष्ट्रपति महोदय के विरुद्ध अभियोग लाने से पहले प्रधानमंत्री, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और मुख्य चुनाव आयुक्त से सहमती लेनी होगी; इसी प्रकार, इन तीनों प्रमुखों के विरुद्ध अभियोग लाने से पहले राष्ट्रपति महोदय से अनुमति लेनी होगी (यह सहमति/अनुमति भी सांकेतिक होगी— तीन महीनों में सहमति/अनुमति को प्राप्तमान लिया जायेगा)— बाकी किसी को निलम्बित करने/हिरासत में लेने से पहले किसी से भी अनुमति या सहमती लेने की जरूरत नही रहेगी।

थ) रही बात लोकपाल सेवा के किसी सदस्य के खिलाफ अभियोग लाने की, तो राष्ट्रीय सरकार दो-तिहाई बहुमत से ऐसा अभियोग पारित कर उसे सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल कर सकेगी और अन्तिम निर्णय सर्वोच्च न्यायालय का होगा। 

5. निचले स्तर पर भ्रष्टाचार नियंत्रण

 5.1  थाना स्तर पर 5-5 सतर्कता मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति की जायेगी, जो अगर चाहें, तो अपनी सहायता के लिये (क) स्थानीय गणमान्य नागरिकों को लेकर एक 12 सदस्यीय ज्यूरी तथा (ख) नौजवानों/छात्रों को लेकर एक सतर्कता बल का गठन कर सकेंगे। (ये मजिस्ट्रेट भारतीय राष्ट्रीय लोकपाल सेवाके अधीन रहेंगे।)

5.2  ज्यूरी, फैसला लेने में सतर्कता मजिस्ट्रेटों की मदद करेगी तथा सतर्कता बल के सदस्य अपने क्षेत्र के अन्दर से घूँसखोरी, कमीशनखोरी, जमाखोरी इत्यादि की सूचना लाकर सतर्कता अदालत में जमा करेंगे; साथ ही, आम नागरिकों को ऐसे सूचना दर्ज कराने में मदद करेंगे।

5.3  इन सतर्कता अदालतों की प्रक्रिया बहुत ही सरल होगी- यहाँ सबूतों, गवाहों, वकीलों की ‘अनिवार्यता’ नहीं होगी और जरूरत पड़ने पर पाँचों मजिस्ट्रेट एक पंचायतके रूप में बैठकर सुनवाई कर सकेंगे।

5.4  इसके सम्मनों की अवहेलना करने वालों पर अलग से जुर्माना लगाया जायेगा।

5.5  इस अदालत में पहली बारदोषी समझे गये अभियुक्तों को चेतावनी देकर छोड़ दिया जायेगा; ‘दूसरी बारजुर्माने, और तीसरी बारदोषी पाये जाने पर जेल की सजा दी जायेगी- हालाँकि दोष की गम्भीरता को देखते हुए तथा सबूत पक्के पाये जाने पर पहली बार में ही जुर्माने या जेल की सजा दी जा सकेगी।

5.6  यह अदालत जरूरी समझने पर भुक्तभोगी को मुआवजा भी दिला सकेगी।

5.7  प्राथमिकी (एफ.आई.आर.) तथा बयान दर्ज करने और पुलिस से प्राथमिकी की प्रगति जानते रहने की जिम्मेवारी भी सतर्कता मजिस्ट्रेटों के पास होगी।

5.8  सतर्कता मजिस्ट्रेट नियमित रूप से अपनी अदालत में दर्ज शिकायत व उनके निर्णय, प्राथमिकी तथा प्राथमिकी की प्रगति की जानकारी अपने राज्य की लोकपाल सेवा के पास भेजेंगे, और फिर राज्यों की लोकपाल सेवाएं उनका संक्षिप्त विवरण राष्ट्रीय लोकपाल सेवा के पास भेजेंगी।

5.9  किसी एक सतर्कता मजिस्ट्रेट की अनुमति, सहमति या आदेश पर ही पुलिस नागरिक या नागरिक समूह पर बल प्रयोग कर सकेगी, उन्हें गिरफ्तार कर सकेगी या हिरासत में ले सकेगी। (सिर्फ घोषित, संगठित, भूमिगत अपराधी तथा भारत-विरोधीआतंकवादी इसके अपवाद होंगे। जाहिर है, आपात्कालीन परिस्थितियों में पुलिस मोबाइल फोन पर भी उक्त अनुमति, सहमति या आदेश प्राप्त कर सकती है।)

5.10 सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों को किसी भी तरह का प्रलोभन देने वाले या उनपर किसी भी प्रकार का दवाब बनाने या प्रभाव डालने वाले नागरिकों के खिलाफ शिकायत लेकर सरकारी अधिकारी/कर्मचारी भी सतर्कता अदालतों में जा सकेंगे।

5.11 नागरिक सेवाओं से जुड़े सभी कार्यालय (सरकारी हों या निजी) एक निश्शुल्क जन-टेलीफोन द्वारा थाना सतर्कता मजिस्ट्रेट से जुड़े होंगे— छोटी-मोटी शिकायतें नागरिक इन फोनों के माध्यम से ही दर्ज करा सकेंगे और सतर्कता मजिस्ट्रेट भी फोन पर ही सम्बन्धित कर्मचारी/अधिकारी को बुलाकर उनका पक्ष सुनकर अपना निर्णय दे सकेंगे।

5.12 फोन पर शिकायत का निराकरण न होने पर या शिकायत गम्भीर होने पर बेशक, इसे लिखित रूप में दर्ज कर दोनों पक्षों को सतर्कता अदालत में बुलाया जायेगा।

5.13 भविष्य में, (जब भ्रष्टाचार का बोल-बाला कम हो जायेगा और इसे नागरिकों की मौन सहमति मिलनी बन्द हो जायेगी, तब नागरिकों के अधिकारोंकी रक्षा करने वाले ये सतर्कता मजिस्ट्रेट) नागरिकों को उनके कर्तव्योंकी भी याद दिलायेंगे; अर्थात् नागरिक कर्तव्यों को तोड़ने वालों (मसलन, सड़क पर कचरा डालने/थूकने वाले) को भी इन सतर्कता अदालतों में पेश किया जा सकेगा।

6. सबके लिए रोजगार

 नौकरी

6.1  इस घोषणापत्र में आगे कई ऐसी योजनाओं, परियोजनाओं तथा निर्माण कार्यों (जैसे, प्रत्येक सौ की आबादी पर एक-एक शिक्षाकर्मी, स्वास्थ्यकर्मी तथा सुरक्षाकर्मी की नियुक्ति करना; सभी नदियों को जोड़ते हुए भूमिगतनहरों का जाल बिछाना; एक सम्पूर्ण भारतीय कम्प्यूटर-प्रणाली का निर्माण करना, इत्यादि) का जिक्र किया गया है, जिसके लिये लाखों की संख्या में अशिक्षित, अल्पशिक्षित, शिक्षित, उच्चशिक्षित और किसी विशेष क्षेत्र में शिक्षित/प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत पड़ेगी।

6.2  इसके लिए न्यूनतम योग्यता (जिक्र अध्याय- 8 में) रखने वाले उम्मीदवारों को एक बहुत ही सरल परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी; बाद में प्रशिक्षण केन्द्रों अथवा रेफ्रेशमेंट कोर्सों में भेजकर उन्हें उस कार्य के योग्य बनाया जायेगा। 

6.3  प्रारम्भ में 18 से 45 वर्ष तक के नागरिकों को रोजगार दिया जायेगा; सबको रोजगार मिल जाने के बाद आयु सीमा 18 से 28 वर्ष कर दी जायेगी।

6.4  भविष्य में- सबको रोजगार मिल जाने के बाद, सरकारी क्षेत्र में नौकरी पाने के लिये लिखित परीक्षा या साक्षात्कार की जरूरत अपने-आप समाप्त हो जायेगी; तब शैक्षणिक योग्यता के आधार पर तथा उम्मीदवार की इच्छानुसार उम्मीदवार को सम्बन्धित विभाग के प्रशिक्षण केन्द्र में भेजकर उसे उस कार्य के योग्य बनाया जायेगा और वहाँ असफल रहने पर उसे दूसरे विभाग/प्रशिक्षण केन्द्र में भेजा जायेगा।

6.5  श्रमिकों का चयन-केन्द्र प्रखण्ड/नगर/उपमहानगर स्तर पर होगा; कर्मचारियों का चयन-केन्द्र जिला/महानगर स्तर पर होगा; पर्यवेक्षकों का चयन-केन्द्र राज्य स्तर पर और अधिकारियों का चयन-केन्द्र राष्ट्रीय स्तर पर होगा।

 

भारतीय राष्ट्रीय श्रम सेवाएं

6.6  देश के समस्त कुशल/अकुशल मजदूरों तथा छोटे किसानों/खेतिहर मजदूरों/दस्तकारों का पंजीकरण कर उन्हें बाकायदे एक सेना की तर्ज पर संगठित किया जायेगा।

6.7  इस सेना के अन्दर पुल-निर्माण, सड़क-निर्माण, रेल-निर्माण, भवन-निर्माण-जैसे अलग-अलग डिविजन होंगे और जनता के पैसों से होने वाला कोई भी निर्माण कार्य इस सेना के माध्यम से ही कराया जायेगा। (जाहिर है, ‘ठीकेदारी प्रथासमाप्त हो जायेगी।)

6.8  इस सेना में दैनिक या साप्ताहिक वेतन दिया जायेगा, जिसमें 6 दिनों के कार्य के बदले 7 दिनों का वेतन तथा घर से दूर कार्यस्थल होने पर भत्ता दिया जायेगा। (एटीएम मशीनों के माध्यम से छोटे मूल्यवर्ग के करेन्सीनोट इन्हें वेतन के रूप में दिये जा सकते हैं।)

6.9  कुशल/अकुशल मजदूरों को वर्ष में चार महीनों की तथा सीमान्त किसानों/खेतिहर मजदूरों/दस्तकारों को वर्ष में छह महीनों की छुट्टी दी जायेगी— छुट्टियों के दौरान वे आधे वेतन के हकदार होंगे, जो उन्हें छुट्टियों पर जाते समय एकमुश्त राशि के रूप में दी जायेगी।

6.10 इस सेना में प्रत्येक 3 कार्य दिवस के बदले 1 दिन का बोनसश्रमिकों के खाते में जमा होगा— इस बोनस राशि को वे त्यौहारों से पहले ले सकेंगे।

6.11 इस सेना में पंजीकृत किसानों, मजदूरों, दस्तकारों और अन्यान्य कर्मचारियों, अधिकारियों, इंजीनियरों के लिये 8 वर्षों में एक बार 3 महीनों का सैन्य प्रशिक्षण अनिवार्य होगा।

6.12 इस प्रकार से, यह विश्व की सबसे बड़ी आरक्षित सेनाहोगी, लेकिन इस सेना में ‘अनुशासन’ उतना ही होगा, जितने से सभी ईमानदारी से अपना काम करें, अनावश्यक अनुशासन और दण्ड का प्रावधान इस सेना में नहीं होगा।)

 

व्यवसाय

6.12 व्यवसाय करने को इच्छुक युवा भारतीय राष्ट्रीय बैंकसे ऋण लेकर आसानी से व्यवसाय शुरू कर सकेंगे। (इस बैंक के गठन का जिक्र अध्याय- 13 में है।)

6.13 सफल व्यवसायियों/उद्यमियों की मदद से एक परामर्श समिति बनायी जायेगी, जहाँ से नये व्यवसायी तथा उद्यमियों को जरूरी मार्गदर्शन दिया जायेगा।

7. सरकारी खर्च

 7.1  एक नया सरकारी वेतनमान तैयार किया जायेगा, जिसमें न्यूनतम व अधिकतम वेतन-भत्तों-सुविधाओं के बीच 15 गुना से ज्यादा का अन्तर नहीं रहने दिया जायेगा। (एक मजदूर को अगर प्रतिमाह 10,000 रुपये वेतन, 3000 रुपये भत्ता तथा रहने के लिये 500 वर्गफीट का मकान मिलता है, तो राष्ट्रपति महोदय को प्रतिमाह 1,50,000 रुपये वेतन, 45,000 रुपये भत्ता तथा रहने के लिये अधिकतम 7,500 वर्गफीट का मकान मिलेगा।)

7.2  वर्तमान राष्ट्रपति भवन’ (गुलामी के दिनों का वायसराय हाउस’) को भारतीय राष्ट्रीय अतिथिशालाका रूप दिया जा सकता है, जहाँ दूसरे देशों से आने वाले राजकीय अतिथियों को ठहराया जा सकेगा।

7.3  पाँच वर्ष तक विधायक/सांसद या जनसंसद (जिक्र अध्याय- 21 में आयेगा) का सदस्य रहने वाले जनप्रतिनिधियों को उनके वेतन का 30 प्रतिशत तथा दस वर्ष तक जनप्रतिनिधि रहने वालों को 40 प्रतिशत पेन्शन के रूप में दिया जायेगा; जबकि, पन्द्रह वर्ष या इससे अधिक समय तक जनप्रतिनिधि रहने वालों को ही उनके वेतन का 50 प्रतिशत पेन्शन के रूप में दिया जायेगा।

7.4  अँगरक्षाकी माँग करने वाले राजनेताओं और उनके परिजनों को किसी एक दुर्ग-जैसे भवनके अन्दर सामूहिकअँगरक्षा प्रदान की जायेगी— हालाँकि यह व्यवस्था बिलकुल मुफ्त नहीं होगी— यानि उन्हें कुछ काम भी करने के लिये दिये जायेंगे।

7.5  अँगरक्षा वाले खास भवन के बाहर किसी को भी अँगरक्षा प्रदान नहीं की जायेगी; और अगर किसी विशेष परिस्थिति में यह दी भी जायेगी, तो उसका पूरा खर्च वसूला जायेगा।

7.6  सभी स्तरोंपर हल्कीसरकारी गाड़ियों की संख्या में 50 प्रतिशत कटौती की जायेगी।

7.7  सेनाओं को उनके दैनिकयुद्धाभ्यासों के दौरान पेट्रो-पदार्थों की खपत में 33 से 66 प्रतिशत तक कटौती करने के लिये कहा जायेगा। (युद्धाभ्यास की भरपाई के लिये 8 वर्षों में एक बार राष्ट्रीय युद्धाभ्यासकी योजना क्रमांक- 50.7 में प्रस्तुत की जा रही है, जिसमें नागरिक भी शामिल होंगे।)

7.8  आम जनता को सीधे तौर पर रोजगार न दिलाने वाली महँगी परियोजनाओं को- देश के खुशहाल बनने तक- स्थगित किया जायेगा।

7.9  बेकार साबित हो चुके मंत्रालय, विभाग, योजना, परियोजनाओं को बन्द किया जायेगा और अनावश्यक अनुदान, राज-सहायता, समारोह, विज्ञापन, पुरस्कार राशि, विदेश दौरों इत्यादि पर भी रोक लगायी जायेगी।

7.10 गणतंत्र दिवस के परेड-जैसे खर्चीले समारोह 5 वर्षों में एक बार आयोजित किये जायेंगे। 

8. भारतीय राष्ट्रीय वेतनमान

 8.1  नये ‘भारतीय राष्ट्रीय सरकारी वेतनमान’ (जैसा कि पिछले अध्याय में जिक्र हुआ है) का एक खाका परिशिष्ट- ‘इ’ में प्रस्तुत किया जा रहा है— इसमें न्यूनतम व अधिकतम वेतन के बीच 1:15 का अन्तर रखा गया है और उदाहरण के लिए10,000 से 1,50,000 तक का वेतनमान दिखाया गया है।

8.2  अगले अध्याय में रुपये का मूल्य बढ़ाने की बात कही जा रही है— ऐसे में, 10,000 से 1,50,000 तक की राशि पर्याप्त साबित होनी चाहिए; अगर ऐसा न हो, तो राशि बढ़ाई जा सकती है, मगर अनुपात वही रहेगा— 1:15।

8.3  विभिन्न विभाग अपनी जरूरत के अनुसार किन्हीं दो श्रेणियों के बीच एक नयी श्रेणी का सृजन कर सकेंगे। (जैसे, 10,000 और 20,000 के बीच 15,000 की एक नयी श्रेणी, या 30,000 और 40,000 के बीच 35,000 की एक नयी श्रेणी।)

8.4  इस वेतनमान में वार्षिक वेतनवृद्धि का जिक्र नहीं है— इसे विशेषज्ञ तय करेंगे, मगर इतना तय होगा कि 30 वर्षों की सेवा होते-होते सभी कर्मी अपने वेतनमान के उच्चतम विन्दु पर पहुँच जायेंगे।

8.5  इसी प्रकार, भत्तों का भी जिक्र इसमें नहीं है, मगर वह जो भी होगा, उसका भी अनुपात 1:15 ही होगा और कुल भत्ता वेतन के 50 प्रतिशत से ऊपर नहीं जायेगा।

8.6  इस वेतनमान में खिलाड़यों को भी वेतन देने का प्रावधान है; उनका सक्रिय खेल जीवन आम तौर पर 10-12 वर्षों का होता है, इसके बाद उन्हें खेल-प्रशिक्षक के रूप में अथवा वेतनमान के आधार पर सामान्य नौकरियों में समायोजित कर लिया जायेगा।

8.7  अर्द्धसैन्य बलों में यह वेतनमान 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ लागू होगा और सशस्त्र सेनाओं में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ।

8.8  पुराना (यानि वर्तमान) वेतनमान पाने वाले अगर चाहें, तो नये वेतनमान को स्वीकार कर नयी सेवा में शामिल हो सकते हैं, अन्यथा—

(क) जिनकी नौकरी 15 वर्ष से अधिक होगी, उन्हें पेन्शन पर भेज दिया जायेगा;

(ख) जिनकी नौकरी 15 वर्ष से कम होगी, उन्हें 15 वर्ष पूरा होने तक घर बिठाये’ ‘मूल वेतनदिया जायेगा और उसके बाद पेन्शन पर भेजा जायेगा।


वेतनमान का खाका परिशिष्ट "इ" में है: http://jaydeepmanifesto.blogspot.com/2024/04/blog-post_38.html

प्रस्तावना

  सड़े हुए पुरातन से चिपके रहना मोह है मित्रों! चारों तरफ से दुर्गन्ध आ रही है। समाज-व्यवस्था हो , शासन-व्यवस्था हो , शिक्षा-व्यवस्था हो , चि...